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निजी बस ऑपरेटरों ने जेएनएनयूआरएम बसों को लेकर उठाया ये मामला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Updated Sat, 24 Feb 2018 11:48 AM IST
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निजी बस ऑपरेटरों ने जेएनएनयूआरएम के तहत चलाई जा रही बसों को 40 किलोमीटर के दायरे में चलाने का मामला उठाया। वहीं परिवहन निगम के अफसरों ने समय अनुसार बसें न चलाए जाने और एचआरटीसी के आगे निजी बसों को रूट दिए जाने की बात कही। शुक्रवार को आरटीओ कार्यालय में हुई बैठक में कुछ ऐसे ही मुद्दे उठे।
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परिवहन निगम और निजी बस ऑपरेटरों के बीच तालमेल बनाने और रूट परमिट में फेरबदल को लेकर हुई बैठक की अध्यक्षता परिवहन विभाग के कमिश्नर बीसी बडालिया ने की। निजी बस ऑपरेटर यूनियन के अध्यक्ष राजेश पराशर ने कहा कि जेएनएनयूआरएम की बसें शहरी क्षेत्रों के लिए लाई गई हैं। बसें चलाए जाने के लिए 13 कलस्टर बनाए गए।
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लेकिन यह बसें 40 किलोमीटर से बाहर भी चलाई जा रही हैं, जिससे निजी ऑपरेटरों को घाटा हो रहा है। उन्होंने कहा कि अगर परिवहन निगम को 40 किलोमीटर के बाहर बसें चलानी हैं तो उन्हें निजी आपरेटरों की तर्ज पर एसआरटी देना चाहिए। उन्होंने कहा कि निजी ऑपरेटरों से बार-बार ग्रीन टैक्स वसूल किया जा रहा है।
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बसों की पासिंग के दौरान, रजिस्ट्रेशन और रोड टैक्स जमा करते वक्त तीन से चार बार यह शुल्क वसूला जा रहा है। उन्होंने एक ही बार यह टैक्स वसूलने की मांग रखी।
ऑपरेटरों ने न्यूनतम किराया कम से कम 10 रुपये किए जाने और 5 साल के बजाए 10 साल बाद निजी ऑपरेटरों की बसें रोड ऑफ किए जाने की बात कही। परिवहन विभाग के कमिश्नर ने परिवहन निगम और निजी ऑपरेटरों को आश्वस्त किया कि समस्या को परिवहन मंत्री के समक्ष उठाया जाएगा।
रूट परमिट में बदलाव के लिए राजी निजी बस ऑपरेटर
निजी बस ऑपरेटर रूट परमिट बदलाव के लिए राजी हो गए हैं। उनका कहना है कि प्रदेश सरकार जब भी रूट परमिट में बदलाव करे, उससे पहले वह निजी ऑपरेटरों को विश्वास में ले।