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Shimla News: एनईपी लागू करने की तैयारी, दो विषयों के पाठ्यक्रम तैयार नहीं

Fri, 17 Jan 2025 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jan 2025 11:59 PM IST
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Preparation to implement NEP, syllabus of two subjects not ready
शिक्षा नीति 2020 के लिए तैयार किए जा रहे पाठ्यक्रम, दर्शन शास्त्र और भू विज्ञान का पाठ्यक्रम तैयार नहीं
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बोर्ड ऑफ स्टडीज न बनने से लटका है मामला
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला नए शैक्षणिक सत्र 2025-26 से कॉलेजों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (एनईपी) को लागू करने के लिए तैयारी कर रहा है। इसमें अधिकतर यूजी के विषयों का एक-एक साल का पाठ्यक्रम तैयार किए जाने का विवि दावा कर रहा है लेकिन दो ऐसे विषय हैं जिनका पाठ्यक्रम अभी तक नहीं बन पाया है। इन विषयों में दर्शन शास्त्र और भू विज्ञान विषय शामिल हैं। इनका पाठ्यक्रम बोर्ड ऑफ स्टडीज न बनने के कारण नहीं बन सका।
हर विषय के बोर्ड ऑफ स्टडीज में शामिल विवि पीजी सेंटर, इक्डोल और कॉलेजों के वरिष्ठ शिक्षक शामिल होते हैं वही एनईपी की गाइडलाइन के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार करने का कार्य कर इसे मंजूरी प्रदान करती है। इन दो विषयों की बोर्ड ऑफ स्टडीज न बनने के कारण पाठ्यक्रम बनाने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। जानकारी के अनुसार विवि ने भू विज्ञान विषय की बोर्ड ऑफ स्टडीज का गठन हाल ही में कर इसकी अधिसूचना जारी की है लेकिन दर्शन शास्त्र की बोर्ड ऑफ स्टडीज को बनाया जाना अभी भी बाकी है।
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विश्वविद्यालय स्तर पर एनईपी को लागू करने से पूर्व तैयारी करने के लिए डीएस की अध्यक्षता में गठित कमेटी की बीते रोज हुई बैठक में इन दो विषयों के बोर्ड ऑफ स्टडीज के गठन पर चरचा हुई है। इसमें कमेटी ने इसका गठन जल्द किए जाने पर जोर दिया। इसके बाद पाठ्यक्रम को तैयार कर इसे विवि की एकेडमिक काउंसिल से मंजूरी दिलवाकर इसका प्रस्ताव ईसी को भेजा जाएगा। हालांकि अभी तक सरकार की ओर से एनईपी-2020 को नए सत्र से लागू करने को लेकर साफ आदेश नहीं आए हैं लेकिन विवि ने तैयारी शुरू कर दी है। विवि के अधिष्ठाता अध्ययन प्रो. बीके शिवराम ने माना कि इन दो विषयों के पाठ्यक्रम को अभी तैयार नहीं किया जा सका है। बोर्ड ऑफ स्टडीज का गठन होने के बाद ही इसमें शामिल शिक्षक गाइडलाइन के अनुसार यूजी का पाठ्यक्रम तैयार कर पाएंगे। इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
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अलग विभाग न होने से दिक्कत
विश्वविद्यालय में इन दो विषयों के पीजी कोर्स पढ़ाने के लिए अलग विभाग न होने से बोर्ड ऑफ स्टडीज का गठन नहीं हो पाया है। इसके लिए विवि को शिक्षा विभाग की ओर से इन दोनों विषयों के वरिष्ठता के अनुसार शिक्षकों की सूची देरी से प्राप्त हुई है। एक विषय की सूची अभी आना बाकी है। वरिष्ठता सूची आने के बाद ही विवि बोर्ड में शिक्षकों को सदस्य बनाकर जिम्मेदारी सौंप पाएगा। विवि में इन विषयों के विभागाध्यक्ष न होने पर संबंधित विषय के डीन को चेयरमैन बनाया जाता है।
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