हिमाचल के लिए जालंधर से मंगाया जाएगा आलू का बीज, ये है बड़ी वजह
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हिमाचल में आलू की फसल लगाने के लिए जालंधर से बीज मंगवाया जाएगा। निमेटोड वायरस से निपटने को प्रदेश सरकार यह वैकल्पिक व्यवस्था कर रही है। लाहौल की मिट्टी की इस साल दोबारा जांच भी की जाएगी।
बीते साल केंद्र सरकार ने हिमाचल सहित देश के चार राज्यों के आलू बीज पर साल 2024 तक प्रतिबंध लगाया है। इसके चलते इस साल कृषि विभाग कुफरी सहित अन्य क्षेत्रों में आलू के बीज नहीं लगा सका है।
हिमाचल के बीज पर प्रतिबंध के बाद कृषि विभाग किसानों की सुविधा को पंजाब से बीज उपलब्ध करवाने की योजना बना रहा है। कृषि विभाग और सीपीआरआई के अधिकारियों के मुताबिक जालंधर का बीज शिमला और आसपास के क्षेत्रों में अच्छी पैदावार दे सकता है।
कृषि विभाग प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजने की तैयारी में जुटा है। बीते साल लाहौल में लगाई गई आलू की फसल की जांच को जल्द लाहौल की मिट्टी की जांच भी की जाएगी।
2024 तक हिमाचल के आलू बीज को प्रतिबंधित किया था
देखा जाएगा कि क्या लाहौल में भी निमेटोड वायरस तो नहीं है। अगर लाहौल की मिट्टी में वायरस नहीं मिलता है तो प्रदेश को बड़ी राहत मिलेगी। बीते साल कृषि मंत्रालय ने सूबे के आलू में सूत्र कृमि (निमेटोड) पाए जाने पर साल 2024 तक हिमाचल के आलू बीज को प्रतिबंधित किया था।
शिमला के सबसे बड़े आलू उत्पादन क्षेत्र कुफरी और फागू में सबसे ज्यादा यह वायरस पाया गया था। इसके चलते ही इस साल कृषि विभाग ने कुफरी में आलू का बीज नहीं लगाया।
लाहौल की मिट्टी में वायरस नहीं मिलने पर केंद्र ने लाहौल के आलू बीज पर लगाए प्रतिबंध को हटा दिया था। इसी कड़ी में कृषि विभाग ने इस साल दोबारा से लाहौल की मिट्टी की जांच करवाने का फैसला लिया है।
कृषि विभाग के निदेशक देसराज शर्मा ने बताया है कि जालंधर से आलू बीज मंगवाने पर विचार चल रहा है। सरकार से चर्चा करने के बाद इस बाबत अंतिम फैसला लिया जाएगा। लाहौल की मिट्टी की भी जल्द जांच की जाएगी।