शिमला: बुजुर्गों को घर-घर जाकर कोरोना वैक्सीन लगाने की तलाशी जाएंगी संभावनाएं
सुनवाई के दौरान निदेशक महिला एवं बाल अधिकारी शिमला ने कोर्ट को बताया कि महामारी कोविड-19 के दौरान जिन बच्चों ने अपने माता या पिता को खोया है उनकी आर्थिक सहायता को 5000 रुपये से बढ़ाकर 6000 रुपये कर दिया है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कोविड-19 के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं प्रदान करने से जुड़ी जनहित याचिका में प्रदेश सरकार ने कोर्ट को बताया कि प्रदेश में बुजुर्गों को उपयुक्त टीकाकरण के लिए उनके घर जाकर टीकाकरण की संभावनाएं तलाशी जाएगी। इस बाबत संबंधित विभागों को उपयुक्त आदेश जारी कर दिए जाएंगे। सुनवाई के दौरान निदेशक महिला एवं बाल अधिकारी शिमला ने कोर्ट को बताया कि महामारी कोविड-19 के दौरान जिन बच्चों ने अपने माता या पिता को खोया है उनकी आर्थिक सहायता को 5000 रुपये से बढ़ाकर 6000 रुपये कर दिया है।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान अस्पतालों में सीसीटीवी लगाने बाबत उठाए गए कदमों की जानकारी देने के आदेश जारी किए हैं। असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल ने हाईकोर्ट को जानकारी दी कि जल्द ही केंद्र सरकार महामारी से निपटने के लिए 32 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर देगी। मामले पर अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी। गौरतलब है कि हाईकोर्ट एक जनहित याचिका के माध्यम से हिमाचल प्रदेश में कोविड-19 के दौरान स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने एवं कोविड-19 अस्पतालों में विभिन्न सुविधाओं को प्रदान करने बाबत याचिका की सुनवाई कर रहा है
न्यायपालिका की स्वतंत्रता में लोगों का विश्वास
न्यायपालिका की स्वतंत्रता में लोगों का विश्वास न केवल जनहित में बल्कि समाज के हित में भी सर्वोपरि है। लोगों के इसी विश्वास को बनाए रखने का दायित्व वकीलों, न्यायाधीशों, विधायकों और अधिकारियों का बनता है। प्रदेश हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी तबादला आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए की। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैध की खंडपीठ ने कहा कि न्यायालय में याचिकाकर्ता जैसे वादी के लिए कोई जगह नहीं है, जिसका न्यायपालिका पर कोई विश्वास नहीं है। मामले के अनुसार लेबर सर्कल शिमला में तैनात लेबर इंस्पेक्टर राजिंदर कुमार ने अपने तबादला आदेशों को हाईकोर्ट में यह कहकर चुनौती दी थी कि उसका तबादला सुंदरनगर सर्कल में तैनात लेबर इंस्पेक्टर अनिल कुमार चौहान को उसके स्थान पर एडजस्ट करने के लिए किया गया है।
उसने निजी प्रतिवादी के पक्ष में डीओ नोट का हवाला देते हुए तबादला आदेशों को रद्द करने की गुहार लगाई थी। याचिका की प्राथमिक सुनवाई पर हाईकोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे और मामले का रिकॉर्ड तलब किया था। मामले का रिकॉर्ड देखने पर कोर्ट ने पाया कि जिस तबादला आदेश को खारिज करने की गुहार प्रार्थी ने हाईकोर्ट से लगाई है। वही गुहार उसने अपने पक्ष में लिए डीओ नोट लगाकर विभाग से कर दी। हाईकोर्ट में अपनी याचिका के लंबित रहते हुए प्रार्थी ने अपने स्तर पर तबादला आदेशों को रद्द करवाने की कोशिश की जिससे अदालत को आभास हुआ कि प्रार्थी का अदालत पर कोई भरोसा नहीं है।