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Kullu Himachal Pradesh: सिग्नल की तलाश में चढ़नी पड़ी दो किलोमीटर की पहाड़ी
Mon, 23 May 2022 12:53 PM IST
अरविन्द ठाकुर
महेंद्र पालसरा, संवाद न्यूज एजेंसी, न्यूली/सैंज (कुल्लू)
महेंद्र पालसरा, संवाद न्यूज एजेंसी, न्यूली/सैंज (कुल्लू)
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 23 May 2022 12:53 PM IST
सार
सिग्नल की तलाश में लोगों को डिपोधारक के साथ पहाड़ी पर चढ़कर राशनकार्ड और आधारकार्ड का मिलान कर ई-केवाईसी करवाना पड़ रहा है। पॉस मशीन में परिवार के सभी सदस्यों का अंगूठा लगाना जरूरी है।
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पहाड़ी पर चढ़कर ई-केवाईसी करवाते ग्रामीण।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
जिला कुल्लू के सैंज की अति दुर्गम पंचायत गाड़ापारली में राशनकार्ड धारकों की ई-केवाईसी करवाना किसी चुनौती से कम नहीं है। सिग्नल की तलाश में दो किलोमीटर की चढ़ाई चढ़कर पहाड़ी के ऊपर पहुंचना पड़ रहा है। डिपोधारकों के लिए बुजुर्गों और महिलाओं का ई-केवाईसी करवाना मुश्किल हो रहा है।
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लोगों को डिपोधारक के साथ पहाड़ी पर चढ़कर राशनकार्ड और आधारकार्ड का मिलान कर ई-केवाईसी करवाना पड़ रहा है। पॉस मशीन में परिवार के सभी सदस्यों का अंगूठा लगाना जरूरी है। राशनकार्ड का आधारकार्ड से मिलान नहीं हो पाया तो उपभोक्ताओं को राशन नहीं मिलेगा।
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रविवार को डिपो धारक धर्मचंद गाड़ापारली पंचायत के मैल गांव में उपभोक्ताओं के राशनकार्ड और आधारकार्ड का ई-केवाइसी करवाने गए थे। सिग्नल की तलाश में दो किलोमीटर ऊपर पहाड़ी पर चढ़ना पड़ा। इसके बाद उपभोक्ताओं का ई-केवाईसी हो पाया। पंचायत प्रधान यमुना देवी, उपप्रधान अजय ठाकुर और देव राज ने बताया कि पंचायत में सिग्नल न होने से लोगों को परेशानी हो रही है।
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कई बार समस्या सरकार और जिला प्रशासन से उठाई, लेकिन समाधान नहीं हो पाया। यमुना देवी ने बताया कि मझाण में मोबाइल टावर लगाने की योजना ठंडे बस्ते में है। उपायुक्त आशुतोष गर्ग ने बताया कि सरकार दुर्गम गांवों को मोबाइल सिग्नल से जोड़ रही है। सरकार को अवगत करवाया है। यहां जल्द मोबाइल टावर लगने की उम्मीद है।
30 किमी लंबी पंचायत में है पांच हजार की आबादी
गाड़ापारली पंचायत लंबाई में 30 किलोमीटर लंबी है। इसमें पांच हजार की आबादी है। पंचायत में उचित मूल्य की चार दुकानों के जरिये उपभोक्ताओं को राशन दिया जाता है। ये दुकानें अति दुर्गम गांव शाक्टी, मझाण, बागीशिहाड़ी, बरेठा और मैल में स्थापित हैं।