जमीन के लिए बढ़ा पौंग बांध विस्थापितों का इंतजार
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देश भर में हो रहे लोकसभा चुनाव के कारण जमीन के लिए पौंग बांध विस्थापितों का इंतजार बढ़ गया है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेशों के अनुसार 20 मार्च तक राजस्थान में विस्थापितों को जमीन दी जानी थी।
राजस्थान में चुनाव की वजह से अफसरों का तबादला होने के कारण विस्थापितों को जमीन देने का मामला करीब ढाई महीने अटका रहेगा। राजस्थान सरकार ने गत 28 फरवरी को 273 विस्थापितों को जैसलमेर में जमीन के मुरब्बे जारी कर दिए हैं।
दूसरे चरण में गत 11 मार्च को आठ सौ और पौंग विस्थापितों को जमीन देनी थी। प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमाचल और राजस्थान के मुख्य सचिवों को आदेश दिए थे कि आपस में बैठ करके पौंग बांध विस्थापितों के मामले 20 मार्च तक सुलझाए जाएं।
राजस्थान सरकार जमीन उपलब्ध कराने में विफल है तो हिमाचल में जमीन का अधिग्रहण करके विस्थापितों का पुनर्वास करें। इसके लिए धनराशि राजस्थान सरकार से ली जाए। इससे पहले वर्ष 1996 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिए थे कि पौंग बांध विस्थापितों की पुनर्वास करें।
पौंग बांध 800 विस्थापितों को नहीं मिले जमीन के मुरब्बे
डीसी आरएंडआर विनय मोदी कहते हैं कि पौंग बांध विस्थापितों के मामलों को देख रहे अधिकारियों का राजस्थान सरकार ने तबादला कर दिया है। इस कारण से जिन आठ सौ विस्थापितों को जमीन के मुरब्बे 11 मार्च को दिए जाने थे, वह नहीं दिए हैं। इन विस्थापितों को मुरब्बे कब दिए जाएंगे? यह सूचना अभी नहीं मिली है।
पौंग बांध के 17100 विस्थापितों का होना था पुनर्वास
राज्य के विशेष सचिव राजस्व केआर सैजल ने बताया कि पौंग बांध के कुल 17100 विस्थापित थे। इसमें से सात हजार विस्थापितों को राजस्थान में जमीन दी जानी है। हाईकोर्ट के आदेश पर 20 मार्च तक विस्थापितों को जमीन देनी है। 28 फरवरी तक 273 विस्थापितों को जमीन दी जा चुकी है।