फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   political

पंचायतें मर्ज करने पर गरमाई सीयासत

Sun, 02 Jan 2022 10:00 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 02 Jan 2022 10:00 PM IST
विज्ञापन
political
शिमला। शहर से सटे पंचायती इलाके नगर निगम में मर्ज करने के प्रस्ताव पर राजधानी की सियासत गरमा गई है। एक ओर सभी पंचायतें इस प्रस्ताव का विरोध कर रही है तो अब दूसरी ओर नगर निगम के भीतर भी इसका विरोध शुरू हो गया है। शहरी इलाके नगर निगम में मर्ज करने के प्रस्ताव पर सोमवार को होने वाले स्पेशल हाउस में इस प्रस्ताव पर हंगामा होने के आसार हैं।
विज्ञापन

मज्याठ पार्षद दिवाकर देव शर्मा का कहना है कि उनके वार्ड के कई इलाके साल 2006-07 में नगर निगम में मर्ज किए गए थे। लेकिन 15 साल बीतने के बावजूद इनमें मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। ऐसे में नये इलाके मर्ज करने का फैसला गलत है। पहले निगम उनमें सुविधाएं दें, फिर नए एरिया शामिल करने पर फैसला ले।
विज्ञापन

भट्ठाकुफर वार्ड से नगर निगम के पूर्व पार्षद नरेंद्र ठाकुर का कहना है कि पंचायती इलाके नगर निगम में मर्ज करने का प्रस्ताव गलत है। साल 2007 में नगर निगम में मर्ज किए गए पंचायती इलाकों के भवन आज तक नियमित नहीं हो पाए हैं। पानी बिजली के नए कनेक्शन लेने के लिए भवन के नक्शे आड़े आते हैं। पंचायतों में ज्यादातर भवन बिना नक्शे के बने हैं। एमसी में आते ही ये अवैध हो जाते हैं। जब पुराने भवनों पर ही कोई फैसला नहीं हो पाया तो नये एरिया को क्यों मर्ज किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

नाभा से कांग्रेस पार्षद सिमी नंदा ने कहा कि नगर निगम में मर्ज करने का फैसला पंचायतों पर थोपना नहीं चाहिए। उनकी सहमति से ही इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला लिया जाना चाहिए। नगर निगम में मर्ज होने से पंचायती इलाकों को सुविधाएं तो मिलेंगी, लेकिन टैक्स समेत अन्य शुल्क भी देने के लिए तैयार रहना होगा।
ये है 2007 में मर्ज किए गए पंचायती इलाकों के हाल
साल 2007 में मर्ज किए गए मज्याठ में अभी तक एंबुलेंस रोड नहीं बना। पार्किंग भी नहीं है। पंथाघाटी एरिया सीवरेज लाइन से नहीं जुड़ा। रास्ते और ड्रेनेज खस्ताहाल है। भट्ठाकुफर क्षेत्र में नियमित पेयजल सप्लाई नहीं मिल रही। मशोबरा में भी सीवरेज कनेक्शन नहीं है। सबसे बड़ी बात इन मर्ज एरिया के हजारों भवन अभी तक अवैध हैं। हजारों भवन ऐसे हैं जिन्हें निगम से पानी की सप्लाई नहीं मिल रही।

पंचायत प्रतिनिधि बोले, हमसे पूछते तक नहीं
शहर से सटे पंचायती इलाके नगर निगम में मर्ज करने के प्रस्ताव पर पंचायतें पहले ही विरोध जता चुकी है। अब नगर निगम सदन में इस मामले पर चर्चा करने के फैसले पर भी पंचायतों ने सवाल उठा दिए हैं। पंचायतों का कहना है कि इस प्रस्ताव पर संबंधित पंचायतों की सहमति ली जानी चाहिए थी। लेकिन सरकार इसके उल्ट नगर निगम सदन की मंजूरी ले रही है। केल्टी बरमू पंचायत के उप प्रधान सुदेश कुमार ने कहा कि हाल ही में उनकी नई पंचायत बनी है। अब यदि उनके वार्ड नंबर एक, दो और चार एमसी में शामिल किए जाते हैं तो फिर पंचायत बनाने का फैसला क्यों लिया गया था। पुजारली पंचायत के उप प्रधान ओमप्रकाश वर्मा का कहना है कि इस प्रस्ताव पर पंचायत कभी सहमति नहीं देगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed