लाहौल में नौनिहालों को नहीं मिलेगी दो बूंद जिंदगी की, जानिए वजह
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इधर, इस बड़ी लापरवाही का ठीकरा अधिकारी एक दूसरे के सिर फोड़ रहे हैं। लाहौल-स्पीति के सीएमओ करीब डेढ़ महीने से घाटी से बाहर टूअर पर हैं। स्वास्थ्य जैसे अहम और संवेदनशील मामलों में विभाग की संवेदनहीनता ने पराकाष्ठा की सभी हदें लांघ दी हैं।
28 जनवरी से पूरे प्रदेश में पल्स पोलियो अभियान शुरू हो रहा है, लेकिन लाहौल घाटी में अभी तक पोलियो की वैक्सीन नहीं पहुंची है। ऐसे में विभाग ने अंतिम समय में पल्स पोलियो अभियान की तिथि बिना किसी व्यापक विज्ञापन के ही आगे खिसका दी है।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल
एक सप्ताह पहले तक भुंतर-लाहौल के बीच हेलीकाप्टर की उड़ानें होती रहीं। आपातकाल में भी रोहतांग सुरंग से अभी भी मरीजों को रेस्क्यू किया जा रहा है। विभाग चाहता तो रोहतांग सुरंग के जरिये वैक्सीन की खेप घाटी में पहुंचा सकता था।
दूरभाष पर मुंबई से सीएमओ लाहौल-स्पीति डीडी शर्मा ने कहा कि हेलीकाप्टर सेवा उपलब्ध न होने से पोलिया की वैक्सीन केलांग नहीं पहुंचाई जा सकी। अब अभियान की तिथि को आगे खिसकाने की अनुमति के लिए सरकार को पत्र लिखा है।
मामले पर स्वास्थ्य मंत्री ने ये कहा
उधर, स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार ने कहा कि पल्स पोलियो अभियान बेहद महत्वपूर्ण है। इसमें चूक की कोई गुंजाइश नहीं है। एक भी बच्चा अगर छूटता है तो पूरे सुरक्षा चक्र पर सवाल खड़ा हो जाता है। कहा कि निदेशालय से इसकी रिपोर्ट तलब की जाएगी।
जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। काजा के बीएमओ डॉ. अंगदुई दोरजे ने बताया कि स्पीति उपमंडल में विभाग की सतर्कता के कारण समय पर पोलियो वैक्सीन को काजा पहुंचाया गया है।
लाहौल स्पीति जिले मेें पोलियो की दो बूंद पिलाने को 50 पोलियो बूथ बनाए गए हैं। इनमें 35 लाहौल और 15 स्पीति में हैं। पूरे जिले में करीब तीन हजार नौनिहालों को दो बूंद जिंदगी की पिलाई जानी है। लाहौल में वैक्सीन उपलब्ध न होने से यह दवाई नहीं पिलाई जा सकेगी।