आधी रात की बैठक में कटा नड्डा का पत्ता, पीएम मोदी ने लिया फैसला
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विधायकों और वरिष्ठ नेताओं का मन टटोल कर जब पर्यवेक्षक नरेंद्र सिंह तोमर और निर्मला सीतारमण और प्रभारी मंगल पांडे वापस लौटे, तो जेपी नड्डा फिर से हिमाचल प्रदेश के सीएम पद की रेस में सबसे आगे हो गए थे।
पर्यवेक्षकों के सामने जयराम ठाकुर और प्रेम कुमार धूमल के समर्थकों की भिड़ंत को देखते हुए धूमल भी नड्डा के नाम पर सहमत हो गए थे।
मगर शनिवार देर रात प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की बैठक में जयराम के नाम पर मुहर लग गई। सूत्रों के मुताबिक शनिवार देर शाम तक नड्डा को मुख्यमंत्री बनाने और जयराम को डिप्टी सीएम या संगठन की कमान देने का फार्मूला तैयार कर लिया गया था।
इसके पीछे ये थी वजह
मगर देर रात पीएम मोदी और शाह की बैठक में आखिरकार जयराम के नाम पर मुहर लग गई। माना जा रहा है कि मोदी नड्डा को मुख्यमंत्री बना कर मंत्रिमंडल विस्तार की जरूरत को बढ़ाना नहीं चाहते थे। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार सहित कई नेताओं की राय विधायकों में से ही सीएम बनाने की थी।
जयराम को सीएम बना कर राज्य में निर्णायक ठाकुर बिरादरी को साधने की सियासी जरूरत पर भी आम राय थी। चुनाव परिणाम आने के बाद सीएम पद के मामले में नड्डा कभी बाजी जीतते तो कभी हारते दिखे।
नड्डा को सीएम बनाने की अटकलें जोर पकड़ने लगीं तो धूमल और उनके समर्थकों ने तीव्र विरोध किया। एक स्थिति ऐसी भी आई जब धूमल खेमा जयराम के विरोध में खड़ा हुआ।
बताते हैं कि शनिवार को धूमल नड्डा के नाम पर सहमत हो गए थे। मगर अंतिम बैठक में राज्य में जातिगत समीकरण साधने के साथ ही नया नेतृत्व तैयार करने के लिए जयराम के नाम पर अंतिम मुहर लगी।
राज्यसभा भेजे जा सकते हैं धूमल
जयराम को मुख्यमंत्री बनाने के फैसले के बाद धूमल परिवार के राजनीतिक भविष्य की चर्चा जोरों पर है।
सवाल यह है कि नेतृत्व की पसंद पर सहमति देने के लिए क्या धूमल और उनके सांसद पुत्र अनुराग ठाकुर को उपकृत किया जाएगा। चर्चा है कि पार्टी धूमल को अप्रैल में राज्यसभा भेज सकती है।