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Shimla News: रहस्यमयी बीमारी की चपेट में प्लम के बगीचे, सूख रहे पत्ते-टहनियां

Fri, 18 Sep 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 18 Sep 2026 11:59 PM IST
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Plum orchards gripped by a mysterious disease; leaves and twigs drying up.
एक्सक्लूसिव
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दवाइयां बेअसर होने से विशेषज्ञ भी हैरान, कोटगढ़-कुमारसैन और जुन्गा के साथ लगते क्षेत्रों में प्लम के बगीचे प्रभावित नौणी विवि और बागवानी विभाग के विशेषज्ञों ने शुरू की जांच
अनिल पंवार
शिमला। जिला शिमला में प्लम के बगीचे रहस्यमयी बीमारी की चपेट में आ गए हैं। इस बीमारी के कारण प्लम के पेड़ों के पत्ते और टहनियां तेजी से सूख रही हैं। हालत यह है कि कई बगीचों में पेड़ों के पत्ते पूरी तरह से झुलस गए हैं। बागवान कई तरह की स्प्रे कर रहे हैं लेकिन इसका असर नहीं हो रहा।
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विशेषज्ञ भी इससे हैरान हैं। शिकायतों के बाद बागवानी विभाग ने नौणी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की अगुवाई में एक टीम गठित कर जांच शुरू कर दी है। जिले में कई क्षेत्रों के प्लम बागवान इस समस्या से जूझ रहे हैं। जिले में कोटगढ़, कुमारसैन, नोहला, जुन्गा के साथ लगते क्षेत्रों से बगीचों में बीमारी फैली है। इन क्षेत्रों में प्लम के बगीचे इस बीमारी से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। प्लम के पेड़ों के पत्ते अचानक सूखने लगे हैं। एक पेड़ के बाद पूरा बगीचा ही चपेट में आ रहा है। कई तरह के फफूंदनाशक भी इस बीमारी पर नियंत्रण नहीं पा सके हैं। प्लम उगाने वाले जुन्गा चायल के रोहित ने बताया कि दवाइयां बेअसर हो गई हैं। पेड़ों की टहनियां भी सूख रही हैं। अन्य बागवानों ने बताया कि प्लम के पेड़ शिखर से नीचे की ओर सूख रहे हैं। यह बीमारी कुछ पेड़ों में नहीं बल्कि पूरे के पूरे बगीचे में फैल रही है। इस कारण पूरे बगीचों पर खराब होने का खतरा मंडरा गया है। यह स्थिति प्लम उत्पादक बागवानों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। बीमारी फैलने के बाद बागवानों को आजीविका और सालों की मेहनत खराब होने का खतरा सता रहा है।
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बगीचों में बीमारी से भारी नुकसान
बागवानों ने विभाग और सरकार से जल्द समाधान की मांग की है। वहीं हिमाचल प्रदेश स्टोन फ्रूट एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक सिंघा ने बताया कि कोटगढ़-कुमारसैन बेल्ट में काफी बगीचे इससे प्रभावित हो गए हैं। इसके अलावा कई अन्य क्षेत्रों से भी इसी तरह की शिकायतें मिली हैं। इसके बाद बीमारी को लेकर बागवानी विभाग और नौणी विश्वविद्यालय को शिकायत की गई। एसोसिएशन की पहल के बाद ही विभाग व विश्वविद्यालय प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। एक विशेषज्ञ टीम का गठन किया है। टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और बगीचों से सैंपल लेकर गई है।




कोट
विशेषज्ञों की टीम ने बगीचों में जाकर प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया है। जांच के लिए गठित टीम ने सैंपल एकत्रित किए हैं। प्रयोगशाला में सैंपलों का अध्ययन किया जा रहा है। अध्ययन की रिपोर्ट आने के बाद ही इसके बारे में कुछ कहा जा सकता है।
-देवीना वैद्य, रिसर्च डायरेक्टर नौणी विश्वविद्यालय
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