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Shimla News: रोबोटिक सर्जरी से जल्द मिलेगी राहत, चिकित्सक करेंगे अध्ययन
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गायनी विभाग करेगा इस पर अध्ययन
अब तक 51 मरीजों की हो चुकी है रोबोटिक सर्जरी
घाव भरने में लगने वाले समय का भी लगेगा पता
आदित्य सोफत
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में गायनी विभाग के चिकित्सक रोबोटिक सर्जरी के बाद मरीजों को कितनी जल्दी राहत मिली और उनकी रिकवरी किस तरह हुई, इसका अध्ययन होगा। इसमें मरीजों के स्वास्थ्य में होने वाले सुधार, घाव भरने में लगने वाला समय और सामान्य गतिविधियों में लौटने की अवधि का आकलन किया जाएगा।
अध्ययन के बाद रिपोर्ट तैयार कर प्रस्तुत की जाएगी। इससे सर्जरी के बाद मरीजों की रिकवरी से जुड़ी विभिन्न जानकारियां सामने आ सकेंगी। अध्ययन से अस्पताल में आधुनिक सर्जिकल तकनीक के परिणामों को समझने और भविष्य में उपचार से जुड़े निर्णयों के लिए चिकित्सकीय आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे। आईजीएमसी में गायनी विभाग की ओर से अब तक 51 रोबोटिक सर्जरी की जा चुकी हैं। इनमें 42 रोबोटिक ऑपरेशन यूट्रस और ओवरी रिमूवल के हैं। इसके अलावा पांच ऑपरेशन फाइब्रॉइड, दो ऑपरेशन सिस्ट और तीन ट्यूब में ब्लॉकेज के हैं। इन सभी मामलों से चिकित्सक अध्ययन के दौरान जानकारी जुटाएंगे।
इस दौरान न केवल सर्जरी के बाद मरीजों को किस तरह की परेशानियां हुईं, इसका भी पता लगाया जाएगा, बल्कि लेप्रोस्कोपिक सर्जरी और रोबोटिक सर्जरी के बीच अंतर को भी स्पष्ट किया जाएगा। अध्ययन में दोनों तरह के ऑपरेशनों के बाद मरीजों की रिकवरी से जुड़े आंकड़ों का आकलन किया जाएगा। साथ ही ऑपरेशन के बाद मरीजों को कितने समय में राहत मिली और दर्द कितनी देर में कम हुआ, इसकी भी जानकारी हासिल की जाएगी। इसके अलावा ऑपरेशन के बाद संक्रमण की स्थिति और अन्य संभावित जटिलताओं से जुड़े पहलुओं को भी अध्ययन का हिस्सा बनाया जाएगा।
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कोट
गायनी विभाग की ओर से अब तक 51 रोबोटिक सर्जरी की जा चुकी हैं। रोबोटिक सर्जरी के बाद मरीजों को कितनी जल्दी राहत मिलती है, समेत अन्य पहलुओं को लेकर अध्ययन किया जाएगा। अध्ययन के बाद रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
-डॉ. आर. ज्योति महाजन, प्रोफेसर, गायनी विभाग
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अब तक 51 मरीजों की हो चुकी है रोबोटिक सर्जरी
घाव भरने में लगने वाले समय का भी लगेगा पता
आदित्य सोफत
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में गायनी विभाग के चिकित्सक रोबोटिक सर्जरी के बाद मरीजों को कितनी जल्दी राहत मिली और उनकी रिकवरी किस तरह हुई, इसका अध्ययन होगा। इसमें मरीजों के स्वास्थ्य में होने वाले सुधार, घाव भरने में लगने वाला समय और सामान्य गतिविधियों में लौटने की अवधि का आकलन किया जाएगा।
अध्ययन के बाद रिपोर्ट तैयार कर प्रस्तुत की जाएगी। इससे सर्जरी के बाद मरीजों की रिकवरी से जुड़ी विभिन्न जानकारियां सामने आ सकेंगी। अध्ययन से अस्पताल में आधुनिक सर्जिकल तकनीक के परिणामों को समझने और भविष्य में उपचार से जुड़े निर्णयों के लिए चिकित्सकीय आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे। आईजीएमसी में गायनी विभाग की ओर से अब तक 51 रोबोटिक सर्जरी की जा चुकी हैं। इनमें 42 रोबोटिक ऑपरेशन यूट्रस और ओवरी रिमूवल के हैं। इसके अलावा पांच ऑपरेशन फाइब्रॉइड, दो ऑपरेशन सिस्ट और तीन ट्यूब में ब्लॉकेज के हैं। इन सभी मामलों से चिकित्सक अध्ययन के दौरान जानकारी जुटाएंगे।
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इस दौरान न केवल सर्जरी के बाद मरीजों को किस तरह की परेशानियां हुईं, इसका भी पता लगाया जाएगा, बल्कि लेप्रोस्कोपिक सर्जरी और रोबोटिक सर्जरी के बीच अंतर को भी स्पष्ट किया जाएगा। अध्ययन में दोनों तरह के ऑपरेशनों के बाद मरीजों की रिकवरी से जुड़े आंकड़ों का आकलन किया जाएगा। साथ ही ऑपरेशन के बाद मरीजों को कितने समय में राहत मिली और दर्द कितनी देर में कम हुआ, इसकी भी जानकारी हासिल की जाएगी। इसके अलावा ऑपरेशन के बाद संक्रमण की स्थिति और अन्य संभावित जटिलताओं से जुड़े पहलुओं को भी अध्ययन का हिस्सा बनाया जाएगा।
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कोट
गायनी विभाग की ओर से अब तक 51 रोबोटिक सर्जरी की जा चुकी हैं। रोबोटिक सर्जरी के बाद मरीजों को कितनी जल्दी राहत मिलती है, समेत अन्य पहलुओं को लेकर अध्ययन किया जाएगा। अध्ययन के बाद रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
-डॉ. आर. ज्योति महाजन, प्रोफेसर, गायनी विभाग