कारोबारियों ने प्रशासन की आंखों में झोंकी धूल, बिना मंजूरी बेच डाले 65 प्लॉट
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नगर नियोजन और ग्रीन एरिया हमीरपुर में कुछ कारोबारियों ने सरकार की बिना मंजूरी के 65 से अधिक प्लॉट बेच डाले हैं। प्लानिंग एरिया में बिना बिल्डर लाइसेंस कोई भी कॉलोनी खड़ी नहीं की जा सकती।
कॉलोनी बसाने के लिए बिल्डर लाइसेंस के साथ-साथ प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, आईपीएच, बिजली बोर्ड, लोनिवि, हिमुडा, वन विभाग, सीवरेज और शहरी निकाय से एनओसी लेना अनिवार्य होता है।
इससे राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली फिर संदेह के घेरे में है। कारोबारियों ने करीब 18 स्थानीय लोगों से जमीन के छोटे-छोटे भूखंड खरीदे और बाद में राजस्व विभाग से मिलकर खानगी तकसीम कर डाली। इसके बाद करीब पांच दर्जन से अधिक लोगों को जमीन के प्लॉट बनाकर बेच दिए।
प्लानिंग एरिया में करोड़ों रुपये के इस सौदे में अब खरीदार फंसने वाले हैं। खरीदारों ने मोटी रकम खर्च कर प्लॉट तो खरीद लिए हैं, लेकिन उन्हें नक्शा पास कराने, पानी, बिजली, सीवरेज, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से एनओसी नहीं मिलेगी।
इन औपचारिकताओं के बिना मकान खंडहर बन सकते हैं। तकनीकी विवि के बेशकीमती भूखंड को एक बंजर भूमि से बदल उसे कुछ कारोबारियों के नाम करने के बाद अब एक और कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है।
जमीन बेचने वालों ने नहीं ली एनओसी
नगर परिषद हमीरपुर के कार्यकारी अधिकारी विनोद कुमार शर्मा ने कहा कि नगर परिषद में एक बड़े भूखंड का सौदा कर वहां पर प्लॉट बिकने की सूचना मिली है। जमीन बेचने वालों ने नगर परिषद से कोई एनओसी नहीं ली है।
मामले की जांच करवाई जाएगी। एनओसी के बिना प्लॉट खरीदारों को पानी बिजली और सीवरेज के कनेक्शन नहीं मिल सकते। जिला टाउन एंड कंट्री प्लानर आरएस प्रेमी ने कहा कि मामला उनके ध्यान में आ चुका है। अगर नियमों का उल्लंघन किया तो कार्रवाई होगी।
एसडीएम हमीरपुर को मामले की जांच के निर्देश
उपायुक्त हमीरपुर राकेश कुमार प्रजापति ने कहा कि नगर परिषद हमीरपुर प्लानिंग एरिया में शामिल है। कॉलोनी या प्लॉटिंग से पहले नियमों को पूरा करना अनिवार्य है।
नहीं तो जमीन खरीदने के बाद खरीदारों को पानी-बिजली व सीवरेज आदि के कनेक्शन लेने में दिक्कतें पेश आ सकती हैं। एसडीएम हमीरपुर को मामले की जांच के निर्देश दे दिए हैं। जमीन किस आधार पर बेची जा रही है, मामले की जांच की जाएगी।