एचपीयू में शिक्षक भर्ती पर फिर मचा बवाल
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एचपीयू में शिक्षकों के दो सौ पदों की भर्ती पर बवाल खड़ा हो गया है। 14 अगस्त को पांच विभागों के रिक्त पदों पर साक्षात्कार होने के बाद कार्यकारी परिषद में नियुक्ति के लिफाफे खोले जाने हैं। भर्ती प्रक्रिया और इन पदों के लिए तय की गई पात्रता शर्तों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। विवि में 28 जून से लेकर छह अगस्त तक अलग- अलग विभागों में रिक्त पड़े सहायक आचार्य के पदों के लिए साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।
प्रशासन के मुताबिक प्रक्रिया में यूजीसी और कोर्ट के आदेशों को ध्यान में रखा गया है। शिमला शहरी विधायक और एबीवीपी भर्ती प्रक्रिया पर शुरू से ही सवाल खड़े कर रहे हैं। इनका आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में चहेतों को लाभ देने के प्रयास किए गए हैं। आरोप यह भी हैं कि 2012 में 37 सहायक आचार्य के पदों के लिए इन्हीं पात्रता शर्तों को तय कर साक्षात्कार हुए।
जिसे विवि के अधिकारियों ने ही गलत करार दिया, इससे मामला कोर्ट चला गया। अब उन्हीं पात्रता शर्तों पर भर्ती की जा रही है। उठे बवाल के बाद एक बार फिर शिक्षक भर्ती के मामले के लटकने के आसार बन रहे है।
इन विभागों के शिक्षकों के खुलने है लिफाफे
विश्वविद्यालय ने लाइफ लांग लर्निंग में अर्थशास्त्र सहायक आचार्य, सोशल वर्क, हिंदी, संस्कृत और समाज शास्त्र विभाग के रिक्त पड़े सहायक आचार्य के पदों के लिए 28 जून से लेकर 6 अगस्त तक साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी की गई है।
कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी ने भर्ती मामलों पर उठ रहे सवालों पर कहा कि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर कार्यकारी परिषद में फैसला होता है। भर्ती कुलपति अपनी मर्जी से नहीं करता। ईसी में जो फैसले लिए गए उसके बाद ही यूजीसी और न्यायालय के आदेशों को ध्यान में रखकर ही प्रक्रिया पूरी की गई है।
राज्यपाल को धूमल, सत्ती ने ज्ञापन सौंपा
प्रदेश विश्वविद्यालय में शिक्षक भर्ती पर सवाल उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सत्ती ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। ज्ञापन में कहा कि प्रदेश सरकार के राजनीतिक हस्तक्षेप से प्रदेश विश्वविद्यालय राजनीति का अखाड़ा बन चुका है।
वर्ष 2012 के सितंबर और अक्तूबर में विवि प्रशासन ने प्राध्यापकों के 37 पदों के लिए साक्षात्कार यूजीसी के मापदंडों के अनुसार किए थे। इसके अंतर्गत सहायक आचार्य के पद को पात्रता नेट, सेट या पीएचडी की डिग्री थी। वर्ष 2012 के अंत में सत्ता परिवर्तन होने के बाद प्रदेश सरकार के इशारे पर विवि प्रशासन ने इन नियुक्तियों को पात्रता और शर्तों के अनुरूप नहीं बताते हुए उस प्रक्रिया को खारिज कर दिया।
यह मामला उच्च न्यायालय के पास दर्ज किया तथा वर्तमान में वहीं लंबित है। कहा कि वर्तमान में विवि प्रशासन प्राध्यापकों के 11 पदों के लिए साक्षात्कार फिर से उन्हीं पात्रता और शर्तों के अनुसार कर रहा है, जिनके अनुसार 2012 में किए थे। चर्चा है कि इन साक्षात्कारों का परिणाम कार्यकारी परिषद की बैठक में निकाल दिया जाएगा।