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ब्रिटेन के संग्रहालय से सोलन आएंगी 1897 में खिंची बड़ोग सुरंग की तस्वीरें

Tue, 02 Oct 2018 12:28 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोलन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोलन Updated Tue, 02 Oct 2018 12:28 PM IST
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pictures of barog tunnel taken in 1897 will be brought back to Solan from the UK Museum

ब्रिटेन संग्रहालय की शोभा बढ़ा रही 1897 में खिंची गई बड़ोग की तस्वीरें सोलन वापस आएंगी। सोलन के जानेमाने होटल कारोबारी और इतिहासकार परिवार से ताल्लुक रखने वाले एसके वर्मा ने इन तस्वीरों को ऑनलाइन नीलामी से खरीदा है।

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अब ये तस्वीरें सोलन में लोगों के सामने प्रदर्शित की जाएंगी जिससे लोग बड़ोग सुरंग और उसके इतिहास की जानकारी, उस जमाने के पहनावे और तौर-तरीके जान सकेंगे। एसके वर्मा ने पत्रकारों से बातचीत कर बताया कि ऐतिहासिक चीजों को एकत्र करने में उनके परिवार की पुरानी रुचि रही है।
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उनके संग्रहालय में 19वीं सदी के ऐतिहासिक अखबार मौजूद हैं। इसके अलावा जन्मतिथि से जुड़े नोट और सोलन की ऐतिहासिक शराब फैक्टरी मोहन मिकिन की स्थापना से लेकर अब तक की यादें उन्होंने संजो रखी हैं।
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उन्होंने कहा कि जब उन्हें ब्रिटेन में बड़ोग सुरंग के निर्माण से जुड़ी तस्वीरें नीलाम होने की सूचना मिली तो वे इसे हासिल करने के लिए तैयार हो गए। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन बोली से उन्होंने सोलन के इतिहास से जुड़ी इन महत्वपूर्ण तस्वीरों को हासिल कर लिया है। 

सोलन के इतिहास को जानने में मिलेगी मदद  

pictures of barog tunnel taken in 1897 will be brought back to Solan from the UK Museum

ये तस्वीरें ब्रिटेन से डाक से उन्हें भेजी जा चुकी हैं और जल्द ही उन्हें मिल जाएंगी। वर्मा ने बताया कि सोलन के इतिहास को लोगों तक पहुंचाने के लिए वे अपने बेकरी उत्पादों का सहारा लेंगे।

उनके यहां बनने वाले सभी तरह के उत्पादों के माध्यम से यह जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाएगी। इस मौके पर एसके वर्मा के पिता ओम प्रकाश वर्मा व उनके बेटे मधुकर वर्मा भी मौजूद रहे। बड़ोग में सुरंग का निर्माण कर्नल बड़ोग ने शुरू किया था।

19वीं सदी के शुरूआत में पूरी हुई कालका-शिमला रेललाइन की सबसे लंबी सुरंग है। एसके वर्मा के पिता ओमप्रकाश वर्मा ने बताया कि पुराने जमाने में चंडीगढ़ से शिमला पहुंचने में पूरा एक दिन लग जाता था।

ब्रिटिशकाल में जो गाड़ियां थीं, वो पहाड़ी सफर में कामयाब नहीं थी और पांच किलोमीटर चलने के बाद गर्म हो जाती थी। उन्हें ठंडा करने के लिए काफी देर तक रोकना पड़ता था। उस जमाने में खिंची गई तस्वीरें अद्भुत हैं। यह सोलन के इतिहास को जानने में ये मील का पत्थर साबित होंगी।

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