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दो दशक में पंडित सुखराम ने चार बार बदला पाला, 1998 में बनाई थी हिविकां

Tue, 26 Mar 2019 05:00 AM IST
Krishan Singh अखिलेश महाजन, अमर उजाला, मंडी
अखिलेश महाजन, अमर उजाला, मंडी Published by: Krishan Singh Updated Tue, 26 Mar 2019 05:00 AM IST
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Pandit Sukhram Sharma political career and Lok Sabha Election 2019
पंडित सुखराम - फोटो : फाइल फोटो

हिमाचल में राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले पूर्व केंद्रीय संचार मंत्री पंडित सुखराम ने छह दशकों के सियासी करियर में ऐन मौके पर चौथी बार पाला बदला है। उन्होंने पहली बार 1998 में कांग्रेस से अलग होकर हिमाचल विकास कांग्रेस पार्टी का गठन किया था। कांग्रेस के राज में केंद्रीय मंत्री रहते पंडित सुखराम दूरसंचार घोटाले में घिरने के चलते पार्टी से निष्कासित कर दिए गए थे।

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इसके तुरंत बाद उन्होंने हिमाचल विकास कांग्रेस (हिविकां) का गठन कर दिया था। 1998 के विधानसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस को 31-31 सीटें मिलीं लेकिन, सुखराम की हिविकां ने धूमल को समर्थन देकर वीरभद्र के नेतृत्व वाली कांग्रेस को महज एक सीट के अंतर से सरकार बनाने से रोक दिया। 
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भाजपा की सरकार में धूमल मुख्यमंत्री बने। पंडित सुखराम ने इसके बाद वर्ष 2003 में परिवार समेत कांग्रेस में वापसी कर ली। उनके बेटे अनिल शर्मा ने सदर से चुनाव लड़ा और सरकार में मंत्री बने। इसके बाद से सुखराम परिवार वर्ष 2017 तक कांग्रेस में रहा।
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लेकिन विधानसभा चुनाव के साल 2017 में वीरभद्र सिंह से नोकझोंक पर चुनाव से ऐन पहले सुखराम परिवार भाजपा में शामिल हो गया। अनिल शर्मा उस वक्त कांग्रेस की वीरभद्र सरकार में पंचायती राज मंत्री थे। अब लोकसभा चुनाव से ऐन पहले पंडित सुखराम शर्मा ने पोते आश्रय के साथ कांग्रेस का दामन थाम लिया है।

चुनावी मौसम में पहले कांग्रेस तो अब भाजपा को दिया झटका

वर्ष 2017 में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले भाजपा का दामन थाम कर कांग्रेस को झटका देने वाले सुखराम परिवार ने डेढ़ साल बाद कांग्रेस में जाकर भाजपा को चुनावी मौसम में झटका दिया है। दिलचस्प है कि यह सियासी घटनाक्रम भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के गृह जिला मंडी की संसदीय सीट पर हुआ है।

अब राजनीतिक गलियारों में वीरभद्र सिंह की उस टिप्पणी की खूब चर्चा हो रही है जिसमें उन्होंने सुखराम को ‘आया राम गया राम’ कहा था। गौरतलब है कि सितंबर 2017 को भ्यूली में युवा कांग्रेस के सम्मेलन में वीरभद्र सिंह और पंडित सुखराम आमने-सामने थे। पूर्व सीएम वीरभद्र ने पंडित सुखराम को ‘आया राम गया राम’ की संज्ञा दी थी। इससे उपजे विवाद के बाद सुखराम परिवार ने भाजपा में शामिल होकर कांग्रेस को झटका दिया था।

Pandit Sukhram Sharma political career and Lok Sabha Election 2019

1967- 1997 तक पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम कांग्रेस में रहे।
1997-1998 में केंद्रीय दूर संचार मंत्री होते हुए घोटालों में घिरने के बाद सुखराम ने हिमाचल विकास कांग्रेस पार्टी बनाई। 
1998 के विधानसभा चुनावों में सुखराम ने भाजपा के साथ गठबंधन किया और प्रदेश में भाजपा हिविकां सरकार बनी। प्रेम कुमार धूमल मुख्यमंत्री बने व सुखराम उप मुख्यमंत्री और वीरभद्र एक सीट से सीएम बनने से रह गए। 
2003 में सुखराम परिवार की कांग्रेस में वापसी हुई। अनिल शर्मा ने सदर से चुनाव लड़ा व सरकार में मंत्री बने।
2017 में विधानसभा चुनावों से पहले सुखराम परिवार पहली बार भाजपा में शामिल हुआ। मंडी विस क्षेत्र से भाजपा को रिकार्ड 10-0 से जीत मिली और मंडी से पहली बार जयराम ठाकुर के रूप में मुख्यमंत्री मिला। 
2019 में सुखराम परिवार की कांग्रेस में घर वापसी हुई।

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