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14 साल बाद इंसाफ : धोखाधड़ी केस में पूर्व महिला प्रधान और सचिव निर्दोष
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साल 2011 में सदर थाना में दर्ज हुआ था मामला, सरकारी दस्तावेजों से छेड़छाड़ और बैक से अधिक धनराशि निकालने के लगे थे आरोप
न्यायिक मजिस्ट्रेट सुस्मिता शर्मा की अदालत ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। करीब 14 साल पुराने धोखाधड़ी मामले में आखिरकार पूर्व महिला प्रधान और सचिव को बड़ी राहत मिली है। सत्र न्यायालय ने मामले में पूर्व प्रधान रेखा देवी (ठियोग) और सचिव बेबी चौहान (कोटखाई) को आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत में उन पर लगाए गए आरोप सिद्ध नहीं हुए और उन्हें दोषी नहीं माना गया। न्यायिक मजिस्ट्रेट सुस्मिता शर्मा ने यह फैसला सुनाया है। इन पर अधिकृत 50 हजार की जगह 60 हजार रुपये बैंक खाते से निकालने के आरोप लगे थे।
यह मामला 17 मार्च, 2011 को सदर पुलिस थाना में पंजीकृत है। शिकायतकर्ता दौलत सिंह चौहान के मुताबिक देवठी पंचायत प्रधान रेखा देवी को मालरोड स्थित सरकारी बैंक से 50 हजार रुपये निकालने के लिए अधिकृत किया गया था। आरोप लगे थे कि महिला प्रधान ने अत्यधिक कर्ज के कारण सरकारी दस्तावेजों से छेड़छाड़ कर अधिकृत राशि से अधिक धनराशि निकाली। सचिव बेबी चौहान पर भी मिलीभगत का आरोप लगा। इसी आधार पर पुलिस ने उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 468, 471 के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच की। अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित करने के लिए 22 गवाह पेश किए, लेकिन अदालत ने साफ किया है कि अभियोजन पक्ष मामले को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। इसलिए आरोपियों को दंडनीय अपराध के लिए निर्दोष करार देते बरी कर दिया।
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न्यायिक मजिस्ट्रेट सुस्मिता शर्मा की अदालत ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। करीब 14 साल पुराने धोखाधड़ी मामले में आखिरकार पूर्व महिला प्रधान और सचिव को बड़ी राहत मिली है। सत्र न्यायालय ने मामले में पूर्व प्रधान रेखा देवी (ठियोग) और सचिव बेबी चौहान (कोटखाई) को आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत में उन पर लगाए गए आरोप सिद्ध नहीं हुए और उन्हें दोषी नहीं माना गया। न्यायिक मजिस्ट्रेट सुस्मिता शर्मा ने यह फैसला सुनाया है। इन पर अधिकृत 50 हजार की जगह 60 हजार रुपये बैंक खाते से निकालने के आरोप लगे थे।
यह मामला 17 मार्च, 2011 को सदर पुलिस थाना में पंजीकृत है। शिकायतकर्ता दौलत सिंह चौहान के मुताबिक देवठी पंचायत प्रधान रेखा देवी को मालरोड स्थित सरकारी बैंक से 50 हजार रुपये निकालने के लिए अधिकृत किया गया था। आरोप लगे थे कि महिला प्रधान ने अत्यधिक कर्ज के कारण सरकारी दस्तावेजों से छेड़छाड़ कर अधिकृत राशि से अधिक धनराशि निकाली। सचिव बेबी चौहान पर भी मिलीभगत का आरोप लगा। इसी आधार पर पुलिस ने उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 468, 471 के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच की। अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित करने के लिए 22 गवाह पेश किए, लेकिन अदालत ने साफ किया है कि अभियोजन पक्ष मामले को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। इसलिए आरोपियों को दंडनीय अपराध के लिए निर्दोष करार देते बरी कर दिया।
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