टेन्योर पूरा होने से दो महीने पहले हो सकते हैं पंचायत चुनाव
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हिमाचल में ग्राम पंचायतों के चुनाव इस बार टेन्योर पूरा होने से दो महीने पहले हो सकते हैं। पिछले अनुभव को देखते हुए इस बार ये चुनाव अक्तूबर में संभावित हैं। एक संभावना चुनाव के दो चरणों में करवाने की भी है। सरकार इन चुनाव पर जल्दी फैसला लेगी कि इन्हें कब तक करवाया जाना है।
पिछली बार पंचायत चुनाव दिसंबर में हुए थे। उस दौरान कई क्षेत्रों में बर्फबारी की वजह से अच्छा मतदान नहीं हो पाया था। पिछले अनुभव को देखते हुए सरकार ये चुनाव या तो दो माह पहले ही अक्तूबर में करवा सकती है अथवा फिर ये दो चरणों में भी करवाए जा सकते हैं।
दो चरणों में अक्तूबर महीने में जनजातीय और बर्फ से ढके रहने वाले दुर्गम क्षेत्रों के चुनाव करवाए जा सकते हैं। अन्य क्षेत्रों के चुनाव बाद में नवंबर या दिसंबर महीने में हो सकते हैं। पंचायती राज मंत्री अनिल शर्मा ने इन संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है कि चुनाव जल्दी या दो चरणों में करवाए जाएं। उन्होंने कहा कि इस बारे में जल्दी फैसला हो जाएगा।
मनरेगा कनवर्जेंस पर सीएम ने मंत्री को पूछा
मनरेगा कनवर्जेंस पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने पंचायती राज मंत्री अनिल शर्मा से पूछा है कि यह क्या मामला है कि पिछले वित्त वर्ष का करोड़ों रुपये का बजट इस वित्त वर्ष में भी अब तक क्यों खर्च नहीं किया जा सका है।
मंत्री अनिल शर्मा ने माना कि उन्हें पिछले दिन सीएम का फोन आया था। उनसे जिला परिषद के सदस्य मिले और उनसे मनरेगा कनवर्जेंस के बजाय 13वें वित्तायोग से आया पैसा सीधे खर्च करने का अनुरोध किया। इस पर उचित कार्रवाई होगी।
20 साल बाद नगर परिषद, नगर पंचायत चुनाव नियमों में होगा संशोधन
हिमाचल में 20 साल बाद नगर परिषद और नगर पंचायत चुनाव के नियमों में संशोधन किया जा रहा है। राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव के तुरंत बाद नगर परिषदों और नगर पंचायत के चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी प्रक्रिया के तहत प्रदेश सरकार ने शनिवार को चुनाव संबंधित नियमों में संशोधित करने की अधिसूचना जारी कर दी है। इसके लिए सरकार ने 15 दिन के भीतर लोगों से सुझाव मांगे हैं। हिमाचल में इस बार नगर परिषदों के चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं होंगे।
प्रदेश सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक वार्डों में जिस श्रेणी की संख्या अधिक होगी, निकाय और नगर पंचायत में वार्ड की सीट उनके पक्ष में जाएगी। इसके अलावा सरकार ने वार्ड सदस्यों के लिए खर्च भी निर्धारित कर दिया है। नगर पंचायत और नगर निकायों में पार्षदों का चुनाव होगा, उसके बाद यह पार्षद चेयरमैन और वाइस चेयरमैन चुनेंगे।
पार्षद खर्च सकेंगे 75 हजार, सदस्य 50 हजार
अगर नगर निकायों में अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों की संख्या पांच प्रतिशत से कम है तो उनके लिए कोई भी सीट आरक्षित नहीं होगी। अनुसूचित जाति और जनजाति की आरक्षित सीटों में से आधी सीटें इन श्रेणियों की महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। आरक्षण को जिलाधीश तय करेंगे और इसे विस्तृत प्रचार देना होगा।
नगर परिषद के लिए पार्षद 75 हजार, जबकि नगर पंचायतों में वार्ड सदस्य 50 हजार रुपये चुनाव में खर्च कर सकेंगे। पहले की अपेक्षा इस बार होने वाले चुनाव खर्च में 5 से 7 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है।
प्रदेश में 52 नगर पंचायत और परिषद- हिमाचल में इस समय 52 नगर परिषद और नगर पंचायत हैं। इनका टेन्योर दिसंबर में पूरा होगा। प्रदेश सरकार ने डीसी को भी चुनाव को वोटर लिस्ट अपडेट करने को कहा है।