पंचायत चुनावः आरक्षण सॉफ्टवेयर को लेकर विवाद
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सूबे में नवंबर-दिसंबर में प्रस्तावित पंचायत चुनाव आरक्षण को लेकर तैयार किए गए सॉफ्टवेयर पर विवाद हो गया है। जिलों को जारी करने से पहले इस सॉफ्टवेयर की जानकारी न तो मुख्यमंत्री को दी गई और न ही मंत्रिमंडल के किसी सदस्य को।
विश्वस्त सूत्रों की मानें तो एक वरिष्ठ मंत्री ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की है। शिकायत में यहां तक कहा गया है कि इस सॉफ्टवेयर के हिसाब से आरक्षण तय हुआ तो फायदा भाजपा को मिलेगा। वीरवार को सचिवालय में एक सवाल के जवाब में खुद मुख्यमंत्री ने भी माना कि उन्हें आरक्षण को लेकर तैयार किए गए सॉफ्टवेयर की जानकारी नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस बारे में किसी ने अवगत भी नहीं करवाया है। उल्लेखनीय है कि सॉफ्टवेयर में ऐसा फार्मूला है जिसमें आंकड़े डालते ही नया आरक्षण तैयार हो जाएगा। इस साल 3,243 पंचायतों में चुनाव होंगे।
पंचायती राज ने तैयार किया है सॉफ्टवेयर
ये जिला परिषद, पंचायत समिति और पंचायत स्तर के प्रतिनिधियों के होने हैं। आरक्षण पर सबकी नजरें टिकी हैं। वर्ष 2010 के चुनावी आरक्षण की इस बार पहली रोटेशन होगी। इसके लिए ही पंचायती राज विभाग ने एक सॉफ्टवेयर तैयार किया है। सूत्रों की मानें तो इसका आइडिया पंचायतीराज मंत्री को केरल यात्रा के दौरान मिला था।
पंचायती राज मंत्री अनिल शर्मा कभी मंडी की सियासत की धुरी माने जाने वाले पूर्व केंद्रीय संचार राज्य मंत्री पंडित सुखराम के बेटे हैं। इसीलिए इस घटनाक्रम के कई सियासी मायने भी निकाले जाने लगे हैं। पंचायतीराज मंत्री अनिल शर्मा ने कहा कि अभी विभाग ने सॉफ्टवेयर फाइनल नहीं किया है। इसे जिलों को जारी करने के सवाल पर अनिल शर्मा ने कहा कि इसे स्टडी करने को दिया गया है। अभी तो उन्हें भी मालूम नहीं है कि यह सॉफ्टवेयर कैसे काम करेगा।