हिमाचल में पंचायत चुनावों का ऐलान, ये रहा पूरा शेड्यूल
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हिमाचल में आखिरकार दूसरे चरण के पंचायत चुनाव की तिथियों की घोषणा कर दी गई है। ये चुनाव जनवरी में आयोजित किए जाएंगे। सरकार ने निर्देश जारी कर दिए हैं। शीत सत्र खत्म होते ही शनिवार को राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से प्रेस कॉन्फ्रैंस बुलाई गई थी जिसमें चुनावों की तिथियों की घोषणा की गई। इसके अनुसार हिमाचल में 1, 3 और 5 जनवरी को मतदान किया जाएगा।
पहले चरण में भरमौर, पांगी और स्पीति ब्लॉकों में पंचायत चुनाव हो चुके हैं। स्पीति में पंचायत समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का भी चुनाव हो गया है। ऐसे में अब दूसरे चरण के चुनाव करवाए जा रहे हैं। चुनावों की घोषणा होते ही सभी जिलों में निर्वाचन अधिकारियों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। वहीं स्थानीय स्तर पर चुनाव की सरगर्मियां भी तेज हो गई हैं।
पढ़िए कब कर सकेंगे नामांकन
राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार जनवरी के पहले हफ्ते में होने वाले इन चुनावों के लिए दिसंबर माह में ही नामांकन संबंधी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी। इसके अनुसार 15, 16 और 17 दिसंबर को नामांकन भरने का काम किया जाएगा। 18 दिसंबर को इनकी समीक्षा की जाएगी। 21 दिसंबर तक उम्मीदवार अपने नाम वापस ले पाएंगे।
इसके अलावा 21 दिसंबर को ही सभी उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न दिए जाएंगे। निर्वाचन आयोग ने चुनाव संबंधी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए भी निर्देश जारी कर दिए हैं। ऐसे में अब अगले दस दिन इन चुनावों के लिए अहम होने वाले हैं। इन दस दिन में ही तय होगा कि कौन किस पद पर चुनाव लड़ने वाला है। ग्रामीण इलाकों में लोग पिछले कई दिन से चुनाव संबंधी अधिसूचना जारी होने का इंतजार कर रहे थे।
कांगड़ा की 748 पंचायतों में अभी चुनाव नहीं
दूसरे चरण के चुनाव की तिथियों में प्रदेश के तकरीबन सभी जिले शामिल किए गए हैं लेकिन जिला कांगड़ा को इसमें शामिल नहीं किया गया है। निर्वाचन आयोग के अनुसार जिले की 748 पंचायतों में चुनाव की तिथियां जल्द ही घोषित की जाएंगी। कुल्लू जिले के आनी ब्लॉक की ग्राम पंचायत जाबन, नमहोग, नगर ब्लाक की करजन और सोयल पंचायत का कार्यकाल जून, 2016 में पूरा होना है, इनके चुनाव की घोषणा भी बाद में होगी।
पंचायत प्रधानों व उप प्रधानों के मतों की गणना चुनाव के दिन ही शाम पांच बजे के बाद की जाएगी। वहीं, पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव की मतगणना 7 जनवरी को की जाएगी। ये मतगणना विकास खंड स्तर पर की जाएगी। चुनाव में किन किन कर्मचारियों की तैनाती होगी, इस बारे में संबंधित कर्मचारियों को सूचित किया जा रहा है।
ये रहेगी खर्च की अधिकतम सीमा
2436 पंचायतों में होने है चुनाव
प्रदेश में 192 जिला परिषद सदस्य, 1280 पंचायत समिति सदस्यों, 2436 प्रधानों व उपप्रधानों और 15,438 ग्राम सदस्यों के लिए तीन चरणों में मतदान होगा।
21 हजार कर्मचारी ड्यूटी पर
तीन चरणों में मतदान के लिए प्रत्येक चरण में 21000 मतदान कर्मी व करीब 11000 सुरक्षा कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी।
खर्च की सीमा
चुनाव में प्रधान, उपप्रधान उम्मीदवार के लिए खर्च की कोई सीमा नहीं होगी। जिला परिषद सदस्य एक लाख जबकि नगर परिषद सदस्य चुनाव में 50 हजार रुपये खर्च कर सकते हैं।
8 दिसंबर बना सकेंगे वोट
प्रदेश में अगर किसी भी व्यक्ति का वोटर लिस्ट में नाम नहीं है, वह 8 दिसंबर तक जिला पंचायत कार्यालय में मतदाता पहचान पत्र बना सकेंगे।
मतपत्र में भी नोटा
राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त टीजी नेगी ने बताया कि पंचायत चुनाव मत पत्र पर होंगे। अगर किसी पंचायत में पांच उम्मीदवार चुनाव मैदान में है तो छठे नंबर पर नोटा होगा। अगर किसी मतदाता को उम्मीदवार पसंद नहीं है तो वह नोटा का प्रयोग कर सकेगा। अगर नोटा में सबसे ज्यादा वोट पड़ते है तो ऐसी स्थिति में नोटा से कम वोट लेने वाला प्रत्याशी विजय घोषित होगा।
प्रदेश में नहीं हो सकेंगी बड़ी घोषणाएं
पंचायत चुनाव के दूसरे चरण की घोषणा होने के साथ ही जिला कांगड़ा, भरमौर और पांगी ब्लाक को छोड़ कर प्रदेश में तत्काल प्रभाव से आचार संहिता लग गई है। आठ जनवरी तक अब राज्य सरकार कोई भी प्रदेश स्तरीय घोषणा नहीं कर सकेगी। अफसरों और कर्मचारियों के तबादलों पर भी प्रतिबंध लग गया है। नए विकास कार्यों पर भी रोक लग गई है।
चुनाव का दूसरा चरण आठ जनवरी को समाप्त होगा। इसके बाद जिला कांगड़ा में चुनाव की घोषणा होगी। ऐसे में दोबारा से प्रदेश स्तरीय घोषणाओं पर ब्रेक लग जाएगी। प्रदेश में नगर निकायों के भी चुनाव होने है। ऐसे में संभावित है कि करीब दो माह तक प्रदेश में विकास कार्य पूरी तरह से थम जाएंगे।
आचार संहिता लगने से रिटेंशन पालिसी का इंतजार कर रहे भवन मालिकों को बड़ा झटका लगा है। इसके अलावा अनुबंध शिक्षकों के नियमितीकरण के आडे़ आ रही 31 मार्च की शर्त भी नहीं हट सकी है। इस शर्त के चलते अनुबंध शिक्षकों को पदोन्नति के लिए आठ से दस महीने का इंतजार करना पड़ रहा है। एसएमसी शिक्षकों की मांग भी पूरी नहीं हो सकी है।