पर्यावरण का विनाश कर रही जैविक खेती: पालेकर
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रासायनिक खेती के साथ-साथ जैविक खेती भी पर्यावरण का विनाश कर रही है। जैविक खेती में इस्तेमाल किए जाने वाले तत्वों में मेटल की मात्रा बहुत अधिक है। खेती की इन दोनों विधियों के चलते मनुष्य जहर युक्त भोजन करने को मजबूर है।
गुरुवार को शिमला में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पद्मश्री सुभाष पालेकर ने कहा कि प्राकृतिक खेती करने वाला किसान कभी भी आत्महत्या नहीं करेगा।
पालेकर ने बताया कि बीते साल से हिमाचल में प्राकृतिक खेती की शुरुआत की गई है।
अब इसके परिणाम दिखना शुरू हो गए हैं। जिन किसानों ने अभ्यास वर्ग में बताई बातों का सौ फीसदी पालन किया है, उनके खेतों में पैदावार पहले के मुकाबले बढ़ी है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से किसानों की आय दोगुना होगी।
पालेकर ने बताया कि हिमाचल के बाद अब उत्तराखंड भी प्राकृतिक खेती अपनाने जा रहा है। कर्नाटक, केरल और छत्तीसगढ़ से भी बात चल रही है। हिमाचल की आर्थिकी सेब पर निर्भर है। प्राकृतिक खेती सेब के लिए लाभदायक है। बीमारियों से बचने के लिए प्राकृतिक खेती ही एकमात्र विकल्प है।
प्राकृतिक खेती से जोड़े जाएंगे 50 हजार किसान
प्रधान सचिव कृषि ओंकार शर्मा ने बताया कि इस साल प्रदेश भर में 50 हजार से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। प्रदेश में साढ़े नौ लाख किसान हैं, इन सभी किसानों को साल 2022 तक इससे जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। प्राकृतिक खेती से सभी किसानों के जुड़ने के बाद कीटनाशकों की बिक्री रुक जाएगी।
प्राकृतिक खेती करने वाला राज्य बनेगा हिमाचल : जयराम
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने गुरुवार को अपने सरकारी आवास ओकओवर में सुभाष पालेकर से कहा कि राज्य सरकार हिमाचल को प्राकृतिक कृषि करने वाला राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। विधायकों को जैविक खेती के लाभ से अवगत करवाने और प्राकृतिक कृषि अपनाने के बारे में जागरूक करने के लिए कार्यशाला होगी।
कृषि विभाग चुने हुए आदर्श गांवों में बीज ग्राम विकसित करने पर विचार करेगा। जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार किसानों की आय वर्ष 2022 तक दोगुना करने को प्रयासरत है। अनाधिकृत कीटनाशकों को बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।