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Shimla News: काम अधूरा छोड़ने पर ठेकेदारों को 1.75 लाख देने के आदेश
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महिला ने घर की छत बदलने का दिया था ठेका
उपमंडल रोहड़ू का मामला, मुकदेमाबाजी खर्च भी देना होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला उपभोक्ता आयोग ने जुब्बल निवासी सपलानी देवी को बड़ी राहत दी है। आयोग ने दो रोहड़ू निवासी ठेकेदार रमेश और हरिदास को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को 1,60,000 की रकम लौटाएं। इसके साथ ही मानसिक उत्पीड़न के लिए 10,000 और मुकदमेबाजी खर्च के रूप में 5,000 का अतिरिक्त भुगतान करें।
यह विवाद जून 2022 में उपमंडल रोहड़ू का है। शिकायतकर्ता सपलानी देवी उर्फ सपना देवी ने अपने पैतृक घर की छत बदलने के लिए दोनों ठेकेदारों से अनुबंध किया था। समझौते के अनुसार काम की कुल लागत 4 लाख तय हुई थी। इसमें सामग्री शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराई जानी थी जबकि काम ठेकेदार करेंगे। शिकायतकर्ता ने काम शुरू करने के लिए एक लाख अग्रिम और बाद में दो किस्तों में 50,000 और 10,000 रुपये का भुगतान किया लेकिन ठेकेदारों ने 17 और 20 अक्तूबर 2022 को पुरानी छत तोड़ने के बाद काम अधूरा छोड़ दिया और दीपावली मनाने घर लौट गए। इसके बाद वह काम पर नहीं आए और न ही कानूनी नोटिस का जवाब दिया। जनवरी 2024 को ठेकेदारों की गैरहाजिरी में मामला एक पक्षीय रूप से सुना गया। आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह ने शिकायतकर्ता के दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर पाया कि ठेकेदारों ने सेवा में गंभीर कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार किया है। आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए दोनों ठेकेदारों को निर्देश दिया कि 45 दिन के भीतर 1,75,000 रुपये अदा करें। इस आदेश से शिकायतकर्ता को आर्थिक राहत तो मिली ही, साथ ही यह निर्णय उन उपभोक्ताओं के लिए भी मिसाल है, जो ठेकेदारों और सेवा प्रदाताओं की लापरवाही का सामना करते हैं।
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उपमंडल रोहड़ू का मामला, मुकदेमाबाजी खर्च भी देना होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला उपभोक्ता आयोग ने जुब्बल निवासी सपलानी देवी को बड़ी राहत दी है। आयोग ने दो रोहड़ू निवासी ठेकेदार रमेश और हरिदास को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को 1,60,000 की रकम लौटाएं। इसके साथ ही मानसिक उत्पीड़न के लिए 10,000 और मुकदमेबाजी खर्च के रूप में 5,000 का अतिरिक्त भुगतान करें।
यह विवाद जून 2022 में उपमंडल रोहड़ू का है। शिकायतकर्ता सपलानी देवी उर्फ सपना देवी ने अपने पैतृक घर की छत बदलने के लिए दोनों ठेकेदारों से अनुबंध किया था। समझौते के अनुसार काम की कुल लागत 4 लाख तय हुई थी। इसमें सामग्री शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराई जानी थी जबकि काम ठेकेदार करेंगे। शिकायतकर्ता ने काम शुरू करने के लिए एक लाख अग्रिम और बाद में दो किस्तों में 50,000 और 10,000 रुपये का भुगतान किया लेकिन ठेकेदारों ने 17 और 20 अक्तूबर 2022 को पुरानी छत तोड़ने के बाद काम अधूरा छोड़ दिया और दीपावली मनाने घर लौट गए। इसके बाद वह काम पर नहीं आए और न ही कानूनी नोटिस का जवाब दिया। जनवरी 2024 को ठेकेदारों की गैरहाजिरी में मामला एक पक्षीय रूप से सुना गया। आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह ने शिकायतकर्ता के दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर पाया कि ठेकेदारों ने सेवा में गंभीर कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार किया है। आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए दोनों ठेकेदारों को निर्देश दिया कि 45 दिन के भीतर 1,75,000 रुपये अदा करें। इस आदेश से शिकायतकर्ता को आर्थिक राहत तो मिली ही, साथ ही यह निर्णय उन उपभोक्ताओं के लिए भी मिसाल है, जो ठेकेदारों और सेवा प्रदाताओं की लापरवाही का सामना करते हैं।
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