हिमाचल वित्त विभाग के आदेश: विभागों के डीडीओ पर संशोधित वेतनमान तय करने की जिम्मेदारी
वित्त विभाग ने संशोधित वेतनमान का सही-सही आकलन कर इससे संबंधित दस्तावेजों को कर्मचारियों के सुझाए विकल्पों से तैयार करने की जिम्मेदारी अब विभागों के वित्त एवं आहरण अधिकारियों पर डाल दी है।
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राज्य वित्त विभाग ने संशोधित वेतनमान का सही-सही आकलन कर इससे संबंधित दस्तावेजों को कर्मचारियों के सुझाए विकल्पों से तैयार करने की जिम्मेदारी अब विभागों के वित्त एवं आहरण अधिकारियों पर डाल दी है। शुक्रवार को वित्त विभाग ने इसके लिए 11 जनवरी के अपने ही आदेश को पलट दिया है। सोमवार को 11 जनवरी के उस आदेश को वित्त विभाग ने वापस ले लिया, जिसमें पे फिक्सेशन के लिए राज्य वित्त एवं लेखा परीक्षा सेवा अधिकारियों की जिम्मेवारी तय की थीं कि वे इनकी वैटिंग कर जिला स्तर के या उपमंडल स्तर के कोषागारों को भेजेंगे।
जनवरी महीने का फरवरी में संशोधित वेतन दिया जाना है। सूत्रों के अनुसार अगर 11 जनवरी के आदेश लागू रहते तो इसमें बहुत ज्यादा देरी होना संभावित है, क्योंकि राज्य वित्त एवं लेखा परीक्षा सेवा अधिकारियों की संख्या सीमित है। ये हर विभाग में पर्याप्त मात्रा में नियुक्त नहीं हैं। राज्य लेखा परीक्षा निदेशालय से ये विभागीय प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए होते हैं। अगर ये हर मामले को वैट करने लग जाएं तो इससे देरी होना तय है। ऐसे में नए संशोधित वेतनमान को तय करने में कई महीने लग जाएंगे।
वित्त विभाग में यह चर्चा हुई है कि आमतौर हर विभाग या कार्यालय में वित्त एवं आहरण अधिकारी होते हैं या फिर अन्य अधिकारियों को डीडीओ की शक्तियां दी गई होती हैं। डीडीओ की संख्या पर्याप्त है। जब ये अन्य महीनों का वेतन निर्धारण भी करते हैं तो संशोधित वेतनमान का फार्मूला समझकर ये इसे भी तैयार कर सकते हैं। नए वेतनमान के नियमों में तो उदाहरण सहित सरल तरीके से समझाया जा चुका है कि कैसे वेतन का निर्धारण होना है। ऐसे में अब डीडीओ कर्मचारियों से विकल्प लेकर खुद पे फिक्सेशन करेंगे और इन्हें जिला स्तर पर या उपमंडल स्तर पर कोषागारों में भेजेंगे। आगे कोष विभाग इनका पुनर्निरीक्षण करेगा।
प्रशिक्षित नहीं हैं सभी डीडीओ, कोषागारों पर बढ़ेगा काम का बोझ
सरकार के इस फैसले से जिला कोषागारों और उप कोषागारों पर काम का बोझ बढ़ेगा। डीडीओ की ओर से पे फिक्सेशन करने पर इसमें भारी गलतियां होना तय है। ऐसे में कोष विभाग को ही दस्तावेजों का अंतिम परीक्षण करना होगा। इसलिए देरी इसमें भी हो सकती है। इसकी वजह है कि सभी विभागों में डीडीओ इस संबंध में पूरी तरह प्रशिक्षित नहीं हैं।