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Shimla News: वाशिंग मशीन ठीक न करने पर कंपनी और डीलर को मुआवजा देने का आदेश
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राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सुनाया फैसला, खरीद के समय ग्राहक को दो और मोटर पर 10 वर्ष की बताई थी वारंटी
वर्ष 2018 में छोटा शिमला के शोरूम से खरीदी थी मशीन
रुचि सांख्यान
शिमला। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने वाशिंग मशीन की खराबी दूर न करने और वारंटी के बावजूद उपभोक्ता को परेशान करने के मामले में कड़ा फैसला सुनाया है।
राज्य आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंदर सिंह मेहता और सदस्य प्रताप सिंह ठाकुर की पीठ ने जिला उपभोक्ता आयोग शिमला के पूर्व आदेश को निरस्त करते हुए उपभोक्ता की अपील को स्वीकार कर लिया। आयोग ने एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, उसके अधिकृत शोरूम और सर्विस सेंटर को आदेश दिया है कि 30 दिन के भीतर विशेषज्ञ इंजीनियर भेजकर उपभोक्ता की संतुष्टि के अनुसार वाशिंग मशीन को ठीक करें। इसके अलावा उपभोक्ता को मानसिक प्रताड़ना के एवज में 10,000 रुपये हर्जाना 9 फीसदी ब्याज सहित देने का आदेश दिया है। इसके अलावा 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च के रूप में देने होंगे।
तारादेवी निवासी राजेंद्र कुमार ने 5 नवंबर 2018 को छोटा शिमला स्थित एक शोरूम से एलजी की एक ऑटोमैटिक वाशिंग मशीन खरीदी थी। खरीद के समय मशीन के कलपुर्जों पर दो वर्ष और मोटर पर 10 वर्ष की वारंटी बताई थी। मार्च 2020 में वारंटी अवधि के दौरान मशीन में तकनीकी खराबी आ गई। शिकायत दर्ज कराने पर पहुंचे मैकेनिक ने मरम्मत के नाम पर 500 रुपये ले लिए लेकिन कोई रसीद नहीं दी। कुछ ही समय बाद मशीन फिर बंद हो गई। दोबारा बुलाने पर मैकेनिक ने दावा किया कि मशीन की अंदरूनी तार चूहों ने कुतर दी है जोकि वारंटी में कवर नहीं होता। इसके लिए उसने बिना किसी बिल या कोटेशन के 2,140 रुपये की मांग रख दी। उपभोक्ता की ओर से बार-बार संपर्क करने और कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद जब कंपनी ने मशीन ठीक नहीं की तो उन्होंने उपभोक्ता आयोग की शरण ली। इससे पहले जिला उपभोक्ता आयोग शिमला ने 29 नवंबर 2023 को यह कहते हुए शिकायत खारिज कर दी थी कि उपभोक्ता वारंटी कार्ड पेश नहीं कर सका इसलिए मशीन का वारंटी में होना साबित नहीं होता। इसके खिलाफ राजेंद्र कुमार ने राज्य आयोग में अपील दायर की थी।
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आयोग ने यह की टिप्पणी
राज्य उपभोक्ता आयोग ने रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद कहा कि सर्विस सेंटर ने अपने जवाब में स्वयं माना था कि मशीन पर दो वर्ष की वारंटी लागू थी। कानून के स्थापित सिद्धांत के अनुसार स्वीकार किए तथ्यों को अलग से साबित करने की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे में वारंटी कार्ड न होने के आधार पर उपभोक्ता का दावा खारिज नहीं किया जा सकता। मशीन पर चस्पा स्टिकर से साफ है कि उसकी स्मार्ट इन्वर्टर मोटर पर 10 साल की वारंटी उपलब्ध थी। कंपनी और सर्विस सेंटर यह साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहे कि तार चूहों ने ही काटी थीं। आयोग के सामने न तो किसी कटी हुई तार की तस्वीर पेश की गई और न ही कोई अधिकृत बिल या रसीद रिकॉर्ड पर लाई गई।
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वर्ष 2018 में छोटा शिमला के शोरूम से खरीदी थी मशीन
रुचि सांख्यान
शिमला। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने वाशिंग मशीन की खराबी दूर न करने और वारंटी के बावजूद उपभोक्ता को परेशान करने के मामले में कड़ा फैसला सुनाया है।
राज्य आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंदर सिंह मेहता और सदस्य प्रताप सिंह ठाकुर की पीठ ने जिला उपभोक्ता आयोग शिमला के पूर्व आदेश को निरस्त करते हुए उपभोक्ता की अपील को स्वीकार कर लिया। आयोग ने एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, उसके अधिकृत शोरूम और सर्विस सेंटर को आदेश दिया है कि 30 दिन के भीतर विशेषज्ञ इंजीनियर भेजकर उपभोक्ता की संतुष्टि के अनुसार वाशिंग मशीन को ठीक करें। इसके अलावा उपभोक्ता को मानसिक प्रताड़ना के एवज में 10,000 रुपये हर्जाना 9 फीसदी ब्याज सहित देने का आदेश दिया है। इसके अलावा 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च के रूप में देने होंगे।
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तारादेवी निवासी राजेंद्र कुमार ने 5 नवंबर 2018 को छोटा शिमला स्थित एक शोरूम से एलजी की एक ऑटोमैटिक वाशिंग मशीन खरीदी थी। खरीद के समय मशीन के कलपुर्जों पर दो वर्ष और मोटर पर 10 वर्ष की वारंटी बताई थी। मार्च 2020 में वारंटी अवधि के दौरान मशीन में तकनीकी खराबी आ गई। शिकायत दर्ज कराने पर पहुंचे मैकेनिक ने मरम्मत के नाम पर 500 रुपये ले लिए लेकिन कोई रसीद नहीं दी। कुछ ही समय बाद मशीन फिर बंद हो गई। दोबारा बुलाने पर मैकेनिक ने दावा किया कि मशीन की अंदरूनी तार चूहों ने कुतर दी है जोकि वारंटी में कवर नहीं होता। इसके लिए उसने बिना किसी बिल या कोटेशन के 2,140 रुपये की मांग रख दी। उपभोक्ता की ओर से बार-बार संपर्क करने और कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद जब कंपनी ने मशीन ठीक नहीं की तो उन्होंने उपभोक्ता आयोग की शरण ली। इससे पहले जिला उपभोक्ता आयोग शिमला ने 29 नवंबर 2023 को यह कहते हुए शिकायत खारिज कर दी थी कि उपभोक्ता वारंटी कार्ड पेश नहीं कर सका इसलिए मशीन का वारंटी में होना साबित नहीं होता। इसके खिलाफ राजेंद्र कुमार ने राज्य आयोग में अपील दायर की थी।
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आयोग ने यह की टिप्पणी
राज्य उपभोक्ता आयोग ने रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद कहा कि सर्विस सेंटर ने अपने जवाब में स्वयं माना था कि मशीन पर दो वर्ष की वारंटी लागू थी। कानून के स्थापित सिद्धांत के अनुसार स्वीकार किए तथ्यों को अलग से साबित करने की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे में वारंटी कार्ड न होने के आधार पर उपभोक्ता का दावा खारिज नहीं किया जा सकता। मशीन पर चस्पा स्टिकर से साफ है कि उसकी स्मार्ट इन्वर्टर मोटर पर 10 साल की वारंटी उपलब्ध थी। कंपनी और सर्विस सेंटर यह साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहे कि तार चूहों ने ही काटी थीं। आयोग के सामने न तो किसी कटी हुई तार की तस्वीर पेश की गई और न ही कोई अधिकृत बिल या रसीद रिकॉर्ड पर लाई गई।