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सूखे ने निचोड़ा नूरपुरी संतरे का रस, इस बार भी नहीं बन पाया सही आकार

Fri, 04 Dec 2020 04:26 PM IST
अरविन्द ठाकुर रितेश महाजन, अमर उजाला नेटवर्क, नूरपुर (कांगड़ा)
रितेश महाजन, अमर उजाला नेटवर्क, नूरपुर (कांगड़ा) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Fri, 04 Dec 2020 04:26 PM IST
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orange crop in Nurpur kangra and drought in himachal pradesh
- फोटो : अमर उजाला

नींबू प्रजाति के फलों की पैदावार में प्रदेश भर में अव्वल छोटे नागपुर के नाम से मशहूर नूरपुर व इंदौरा उपमंडल के बागवानों की मुसीबतें कम होती नहीं दिख रही हैं। इस बार भी सीजन में मौसम की बेरुखी के चलते संतरे और किन्नू के रंग में निखार नहीं आया है और न ही अब तक सही साइज बन पाया है। हालांकि, बगीचों की सौदेबाजी के लिए व्यापारियों और आढ़तियों की संतरे के बगीचों में दस्तक से बाजार में छोटे नागपुरी किन्नू की छुटपुट आमद शुरू हो गई है।

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लेकिन समय पर बारिश न होने से किन्नू से रस व मिठास गायब है। हालांकि, दिवाली के बाद हुई बारिश से जमीन की नमी बढ़ी है, लेकिन इससे संतरे के साइज पर कोई खास असर नहीं दिख रहा हैं पर मिठास थोड़ी बहुत अवश्य बढ़ी है। जिन जगहों पर सिंचाई की सुविधा है, वहां संतरे का आकार बेहतर है व फल में मिठास भी है। लेकिन नूरपुर उपमंडल में ज्यादातर बागवान सिंचाई के लिए सिर्फ बारिश पर ही निर्भर है। बावजूद इसके आने वाले दिनों में एक अच्छी बारिश के बाद फलों का रंग निखरने से बागवानों को फसल के अच्छे दाम मिल सकते हैं।
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उल्लेखनीय है कि छोटे नागपुर के नाम से मशहूर नूरपुर व इंदौरा क्षेत्र के बागवान माल्टा, संतरा, किन्नू व मौसमी की उम्दा फसल की पैदावार में अग्रणी माने जाते हैं। यहां करीब 3700 हेक्टेयर भूमि में संतरे व किन्नू की पैदावार होती है। यहां से हर साल संतरे व मौसमी की फसल पड़ोसी राज्यों में भेजी जाती है। वहीं, विभागीय आंकड़ों पर नजर दौड़ाए तो कांगड़ा जिले में कुल बागवानी उपज 37878 हेक्टेयर भूमि में से करीब 21245 हेक्टेयर भूमि पर सिर्फ आम की पैदावार होती है।
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उधर, इलाके के बागवान रमेश पठानिया, ओंकार सिंह, केवल सिंह पठानिया, करनैल सिंह, जतिंद्र पठानिया, रमेश सिंह, बलदेव सिंह, मुकेश शर्मा, रघुवीर सिंह आदि का कहना है कि साल-दर-साल मौसम की बेरुखी के चलते बागवानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। इस बार भी समय पर बारिश न होने के कारण फलों का सही आकार व रंग नहीं बन पाया है। अच्छी पैदावार के लिए सिंचाई सुविधा मुहैया करवाने की जरूरत है।

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