शिक्षकों की नई स्थानांतरण नीति पर विपक्ष ने सरकार को घेरा
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शिक्षकों की नई स्थानांतरण नीति पर विपक्ष के विधायकों ने सरकार को घेरा। कहा कि सरकार को साफ करना चाहिए कि वह शिक्षकों के स्थानांतरण को नीति बना रही है कि एक्ट।
रूसा सिस्टम पर सरकार पर यू-टर्न लेने का आरोप लगाने के साथ शिक्षण संस्थान बंद करने और अस्थायी शिक्षकों के लिए नीति नहीं बनाने पर सरकार को घेरा। वीरवार को सदन में शिक्षा पर कटौती प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने सत्ता पक्ष पर तीखे जुबानी प्रहार किए।
कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदेश में शिक्षकों की करीब 250 यूनियनें हैं। एकतरफा माहौल बनाने के बजाय सरकार को सबको विश्वास में लेकर इस मुद्दे पर चर्चा करनी चाहिए।
किस सेवानिवृत्त कर्मचारी का तबादला किया : सीएम
कहा कि भाजपा ने रूसा सिस्टम को खत्म करने की बात की, मगर अब कहा जा रहा है कि रूसा खत्म नहीं होगा। नादौन से कांग्रेस विधायक सुखविंद्र सुक्खू ने कहा कि हर जगह प्राइवेट संस्थान खोले जा रहे हैं। एक ही स्थान पर अगर दो स्कूल खोले गए हैं।
इनमें एक सरकारी तथा एक निजी स्कूल है। लोग बच्चों को निजी स्कूलों में ही रखना पसंद करते हैं। मुकेश के मामला उठाने के बाद सीएम जयराम ठाकुर बोले - इसका बार-बार जिक्र किया जा रहा है कि सेवानिवृत्त कर्मचारी को सरकार ने स्थानांतरित किया है।
विपक्ष बताए तो सही कि ये कौन कर्मचारी हैं। अगर ऐसा हुआ है तो सरकार ऐसा करने वालों पर कार्रवाई करेगी। मुकेश अग्निहोत्री ने कहा - प्रदेश सरकार में जनसंपर्क विभाग आपका है। इस पर मुख्यमंत्री बोले - अगर इसकी तारीख सहित सही-सही सूचना दी जाएगी तो इस पर जरूर कार्रवाई की जाएगी।
एसएमसी शिक्षकों से दोगला व्यवहार कर रही सरकार
शिलाई के कांग्रेस विधायक हर्षवर्द्धन चौहान ने कहा कि राज्य में एसएमसी शिक्षक दूरदराज क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं। सरकार इनके बारे में सही व्यवहार नहीं कर रही है। इनके साथ सरकार बाहर कुछ और बात करती है और भीतर कोई और बात होती है।
इनके लिए नीति बनाई जानी चाहिए। किन्नौर से कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी ने भी कहा कि सरकार एसएमसी शिक्षकों के साथ दोगला व्यवहार न करे। विधायक सुखविंद्र सुक्खू बोले - पीटीए, पैरा, पैट, एसएमसी शिक्षकों को नियमित करने के लिए नीति बनाई जानी चाहिए।
जयराम सरकार का पहला बजट ध्वनिमत से पारित
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की ओर से नौ मार्च को प्रदेश विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2018-19 का वार्षिक बजट पेश किया गया। 41 हजार 440 करोड़ रुपये का यह बजट वीरवार को विधानसभा में पास हो गया।
इसके लिए मुख्यमंत्री ने प्रदेश विधानसभा में हिमाचल प्रदेश विनियोग विधेयक 2018 रखा। इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इससे पहले बजट पेश होने के बाद सोलह घंटे 49 मिनट तक सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने इस पर चर्चा भी की।
चर्चा के बाद वीरवार को ढाई बजे गिलोटिन लग गया। इसके बाद ध्वनि मत से बजट पास हो गया। अब बजट को राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। यहां से औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद एक अप्रैल से यह प्रदेश में लागू होगा।