बीपीएल सूची में शामिल होंगे एक लाख नए परिवार, मंत्री ने विधानसभा में दी जानकारी
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ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि पंचायतों को बीपीएल मुक्त बनाने के लिए कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। सरकार गरीबी से जूझ रहे नए परिवारों को बीपीएल सूची में लाएगी, जबकि सालों से लाभ ले रहे ऐसे परिवारों को सूची से बाहर किया जाएगा।
सरकार चाहती है कि सही मायने में गरीबों को मुफ्त मकान, बिजली, पानी और गैस सुविधा मिले। मनरेगा में 50 दिन की दिहाड़ी भी इन परिवारों को लगाना जरूरी होगी। 70 साल से अधिक उम्र के गरीब बुजुर्गों और दिव्यांगों पर इसकी कोई बंदिश नहीं होगी।
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नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री सदन में नियम 62 के तहत बीपीएल परिवारों के संबंध में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाए। उन्होंने सरकार से पूछा कि 2500 की आय सीमा वाले ही बीपीएल सूची में रह सकते हैं।
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मनरेगा में 100 दिन की दिहाड़ी लगाना अनिवार्य कर दिया है। गरीबों को बीपीएल सूची से बाहर किया जा रहा है। सरकार गरीबी नहीं, गरीब को मिटाने की कोशिश कर रही है।
इन शर्तों पर पुन: विचार किया जाए। जब ग्रामसभा को बीपीएल सूची बनानी है तो फिर कमेटी बनाने का क्या मतलब है। एक लाख परिवारों को बीपीएल सूची से बाहर करने का लक्ष्य रखा है। आशीष बुटेल ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में 2937 लोग बीपीएल सूची से बाहर किए गए हैं।
गरीबी रेखा से ऊपर उठाने का प्रयास करेंगे : कंवर
इस पर मंत्री बोले, बीपीएल सूची से उन एक लाख परिवारों को बाहर किया जाना है, जो पिछले बीस साल से सूची में हैं। इनके जीवन स्तर में सुधार आया है। ऐसे संपन्न लोगों के बदले नए एक लाख परिवार सूची में शामिल किए जाएंगे।
ऐसे बीपीएल लोगों को 50 दिन की दिहाड़ी मनरेगा में दी जाएगी। ऐसे गरीबों को स्वरोजगार के लिए ग्रामीण कौशल विकास प्रशिक्षण देंगे। बीपीएल परिवारों के स्वयं सहायता समूह भी बनाए जाएंगे।
छह अप्रैल, 2008 में 15659 बीपीएल परिवार सूची से बाहर हुए थे। नए 15331 परिवारों को सूची में शामिल किया। 2011 में 31209 परिवार बाहर निकाले और 30970 सूची में रखे गए।
पंचायतीराज मंत्री ने कहा कि 2 अक्तूबर की ग्रामसभा में एक लाख गरीबों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाने का प्रयास किया जाएगा। सरकार गाय-बकरी खरीदने और मुर्गी पालन के लिए वित्तीय मदद देगी। पंचायतों को लक्ष्य भी दिया जाएगा।