ख्ातरे में बब्बर शेर का वजूद
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बब्बर शेर पर देश में बवाल मचा है। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आमने सामने हैं। लेकिन बब्बर शेर के संरक्षण पर कोई नीतियां बनाने के मूड में नहीं दिख रहा है।
वहीं, हिमाचल प्रदेश में भी बब्बर शेर की प्रजाति खत्म होने के कगार पर है। प्रदेश के इकलौते सिरमौर के रेणुकाजी वन्य जीव विहार में केवल दो ही बूढ़े बब्बर शेर बचे हैं। एक नर और दूसरी मादा।
उसमें भी नर शेर की नसबंदी की जा चुकी है। इसे बचाने को लेकर राज्य की किसी भी पार्टी की सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। अगर आगे भी ध्यान न दिया गया तो हिमाचल में किताबों में ही बब्बर शेर नजर आएंगे।
रेणुका में होते थे 20 से ज्यादा शेर
एक दशक पहले तक रेणुकाजी वन्य जीव विहार में 20 से अधिक बब्बर शेर हुआ करते थे। लेकिन अचानक उनसे पैदा होने वाले शावकों में ‘पैराप्लीजिया’ नाम की बीमारी होनी शुरू गई। इससे ये शावक अपंग होने लगे। इसके चलते 1998 से 2000 के दौरान एक-एक कर सात शावकों की मौत हो गई।
इसके साथ ही बूढ़े हो चुके बब्बर शेरों की भी एक के बाद एक की मृत्यु हो गई। जंगलात महकमे के अफसरों ने नर शेरों की नसबंदी कराकर अपने कर्तव्य को पूरा कर लिया। कभी भी दूसरे राज्य से नर या मादा बब्बर शेर मंगाकर नस्ल बदलने की आधी अधूरी कोशिश की गई, ताकि हिमाचल में बब्बर शेर के अस्तित्व को बचाया जा सके।
प्रदेश के वनमंत्री टीएस भरमौरी का कहना है कि बब्बर शेर नहीं, अभी चुनाव प्रचार का समय है। चुनाव बाद बब्बर शेर की चिंता की जाएगी। जरूरत पड़ी तो केंद्र सरकार की मदद से बब्बर शेर का नया सेंटर खोल देंगे।