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शिमला: अब सर्दियों में पौष्टिक चारे की नहीं होगी कमी, एचएफआरआई ग्रामीणों को दे रहा प्रशिक्षण

Tue, 08 Oct 2024 11:33 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यज एजेंसी, शिमला
संवाद न्यज एजेंसी, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 08 Oct 2024 11:33 AM IST
सार

रझाना पंचायत के बड़ागांव, पट्टी और सलांज से 38 ग्रामीणों और जुन्गा के 40 ग्रामीणों को प्रशिक्षित किया गया है

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Now there will be no shortage of nutritious fodder in winter, HFRI is giving training to villagers
पोषक चारा - फोटो : संवाद

विस्तार

सर्दियों में हरे चारे की कमी को दूर करने के लिए हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान (एचएफआरआई) बड़ागांव और जुन्गा में दो साल से ग्रामीणों को प्रशिक्षण दे रहा है। ग्रामीणों को साइलेज बनाने की प्रक्रिया सिखाई गई। इससे वे सर्दियों में भी पशुओं के लिए पोषक चारा खिला पाएंगे। रझाना पंचायत के बड़ागांव, पट्टी और सलांज से 38 ग्रामीणों और जुन्गा के 40 ग्रामीणों को प्रशिक्षित किया गया है। इसके साथ ही हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान ने बड़ागांव के पास व्यूल, कचनार, खड़क और बान के 800 से अधिक पौधे रोप कर चारा बैंक की स्थापना की है। यह चारा बैंक भविष्य में पशुपालकों को हरे चारे की आपूर्ति करेगा। रझाना पंचायत के उपप्रधान मुकुंद्र मोहन शांडिल ने कहा कि यह प्रशिक्षण ग्रामीणों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा।

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साइलेज को अधिक समय तक सुरक्षित रखने के लिए यूरिया का प्रयोग भी किया जा सकता है। इसका एक साल तक उपयोग किया जा सकता है। साइलेज किसी भी बचे बचे हुए खाने, खेती के बाद बची चीजें जैसे मक्की के गंठल या बेलों का उपयोग करके बनाया जा सकता है। साइलेज में सूखी घास के मुकाबले कहीं ज्यादा पौष्टिक तत्व और फीड के मुकाबले कम रसायन होते हैं। यह पशुओं के स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। साइलेज का उपयोग करने से दुधारू पशुओं के दूध की गुणवत्ता में सुधार होता है। इसे 4-8 किलो तक रोजाना खिलाया जा सकता है।

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यह है विधि : 100 किलो हरे चारे के लिए लगभग 2-3 किलो गुड़, 50 ग्राम नमक और एयरटाइट थैलियों की आवश्यकता होती है। हरा चारा छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है। इसमें पानी में घुले हुए गुड़ और नमक का मिश्रण मिलाया जाता है। इसके बाद इस मिश्रण को एयरटाइट थैलियों में बंद कर दिया जाता है। यह प्रक्रिया 45-60 दिनों में पूरी होती है और सर्दियों में यह पशुओं के लिए पौष्टिक चारा बन जाता है।

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साइलेज दुधारू पशुओं के लिए बेहतरीन आहार है। इसे हरे चारे से तैयार किया जाता है। इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीणों को चारा बैंक का महत्व समझाना और साइलेज बनाने की व्यावहारिक विधि की जानकारी देना है ताकि सर्दियों में भी पशुओं को पौष्टिक चारा मिल सके।-डॉ. संदीप शर्मा, निदेशक, एचएफआरआई

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