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लाखों बागवानों को झटका, बजट खत्म सरकार ने बंद की सब्सिडी

Sat, 04 Mar 2017 01:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 04 Mar 2017 01:04 PM IST
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Now no subsidy to farmers in himachal

केंद्र और प्रदेश सरकार ने जिले के सेब बागवानों को बड़ा झटका दिया है। ओलों से फसलों के बचाव के लिए बागीचों में लगने वाली जालियों पर उद्यान विभाग अनुदान नहीं दे रहा है। विभाग के पास जालियों पर सब्सिडी देने के लिए बजट ही नहीं है। जिले में हर साल पचास से साठ प्रतिशत ओलों से फसलों का नुकसान होता है। 

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प्रदेश सरकार और उद्यान विभाग बागीचों में ओलों से फसल बचाने के लिए बागवानों को बागीचों पर जालियां लगाने के लिए प्रेरित करते हैं। 80 प्रतिशत अनुदान भी दिया जाता है। पिछले लंबे समय से जालियों पर अनुदान देने के लिए विभाग के पास बजट न होने से  सैकड़ाें बागवानों को जालियों पर किसी भी तरह की सब्सिडी नहीं मिल रही है। 
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दो लाख हैं सेब के बागवान 
जिले में करीब दो लाख से ज्यादा सेब और अन्य फलों के बागवान हैं और पहाड़ी क्षेत्रों में ज्यादातर फसलों का नुकसान फलों पर ओलों के गिरने से होता है। बीते साल जिले में करीब तीन करोड़ सेब की पेटियों का उत्पादन हुआ था और अगर ओलों से फसल बरबाद न होती तो आंकड़ा दोगुना होता।

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5000 वर्ग मीटर जाली पर मिलता है अनुदान

Now no subsidy to farmers in himachal

बागवान को बागीचे में ओलों से फसल के बचाव के लिए 5000 वर्ग मीटर जाली पर 80 प्रतिशत अनुदान देने की सरकार की योजना थी। बागवान डेढ़ लाख खर्च कर जालियां खरीदता है उसके बाद अनुदान के लिए दस्तावेज पूरे करता है। 

लेकिन विभाग के पास समय पर बागवानों को अनुदान देने के लिए बजट ही नहीं होता जिस कारण लाखों बागवानों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 

खत्म हो गया जालियों पर अनुदान देने का बजट
जिला उद्यान विभाग के उप निदेशक एनके मेहता ने बताया कि ओलावृष्टि से बचाव के लिए जालियों पर मिलने वाला बजट खत्म हो चुका है। बजट मिलते ही बागवानों का अनुदान दिया जाएगा। 

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