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Shimla News: जिले के मंदिरों में अब टौर की पत्तलों में परोसा जाएगा लंगर

Fri, 12 Jul 2024 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jul 2024 11:59 PM IST
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Now langar will be served in taur leaves in the temples of the district.
राजधानी के तारादेवी मंदिर में कल से शुरू होगी अभियान की शुरुआत, ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को मिलेगा रोजगार
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सक्षम कलस्टर फेडरेशन को दिया पांच हजार पत्तल बनाने काआर्डर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के प्रसिद्ध तारादेवी मंदिर में श्रद्धालुओं को अब टौर की पत्तल में लंगर परोसा जाएगा। संस्कृति को संजोए रखने और संतुलित पर्यावरण के लिए जिला प्रशासन ने मंदिरों में टौर के पत्तों से तैयार हरी पत्तल में लंगर परोसने का फैसला लिया है।

रविवार को 14 जुलाई से पहले चरण में तारादेवी मंदिर में इस व्यवस्था की शुरुआत होगी। इसके बाद जिले के बाकी मंदिरों में भी टौर की पत्तल में लंगर परोसने की व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से शुरू की जाएगी। शिमला में शुक्रवार को हुई बैठक में उपायुक्त अनुपम कश्यप ने बताया कि जिला ग्रामीण विकास प्राधिकरण के तहत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सुन्नी खंड में कार्य कर रहे सक्षम क्लस्टर लेवल फेडरेशन को टौर की पत्तल बनाने का जिम्मा सौंपा है। पहले चरण में पांच हजार पत्तल बनाने का ऑर्डर दिया है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को रोजगार के अवसर मुहैया करवाने के लिए जिला प्रशासन प्रयासरत है। फेडरेशन में 2900 से अधिक महिलाएं पत्तल बनाने का काम करती हैं। पत्तलों की डिमांड कम होने से उत्पादन अधिक नहीं करते थे। अब प्रशासन के फैसले से फेडरेशन से जुड़ी महिलाओं को फायदा होगा।
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सक्षम कलस्टर लेवल फेडरेशन के प्रतिनिधियों ने बैठक में उपायुक्त को पत्तलों के उत्पादन के बारे में जानकारी दी है और बनाए पत्तल भेंट किए। फेडरेशन ने बताया कि इस क्षेत्र में टौर के पेड़ बहुत कम है। उपायुक्त ने वन विभाग के सहयोग से पौधारोपण अभियान में टौर के पौधे लगाने के निर्देश दिए हैं। हरी पत्तल पर्यावरण को बचाने के लिए मददगार साबित होगी। प्रदेश में प्लास्टिक से बनी पतली, गिलास और चम्मच के उपयोग पर सरकार की ओर से प्रतिबंध लगाया है। बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त अभिषेक वर्मा, पीओ डीआरडीए कीर्ति चंदेल, पल्लवी पटियाल प्रबंधक एनआरएलएम, सक्षम कलस्टर लेवल फेडरेशन की अध्यक्षा रीमा वर्मा, दीपा, तारा, पुष्पलता और कृष्णा मौजूद रहीं।
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पत्तलों में परोसी जाती है धाम
हिमाचल में शादी ब्याह और अन्य समारोह में हरी पत्तलों में ही धाम परोसी जाती है। टौर से बनने वाली इस पत्तल में सामाजिक समरसता के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। पहाड़ की यह पत्तल टौर नामक बेल के पत्ते से बनती है। यह बेल मध्यम ऊंचाई वाले शिमला, मंडी, कांगड़ा और हमीरपुर जिले में पाई जाती है।


टौर की पत्तल की खूबियां
टौर की बेल कचनार परिवार से संबंधित है। इसमें कई औषधीय गुण भी पाए जाते हैं। भूख बढ़ाने में भी यह मदद करती है। एक तरफ से मुलायम होने वाले टौर के पत्ते को नैपकिन के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। टौर के पत्ते शांतिदायक और लसदार होते हैं। यही वजह है इनसे बनी पत्तलों पर भोजन खाने में काफी आनंद मिलता है। टौर के पत्ते गड्ढे में डालने से दो से तीन दिन के अंदर गल सड़ जाते हैं। लोग इसका उपयोग खेतों में खाद के रूप में भी करते हैं।
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