दफ्तरों के चक्कर छोड़िए, अब अस्पतालों में ही मिलेगी ये सुविधा
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हिमाचल के शहरी क्षेत्रों में अब बड़े और जिला अस्पतालों में ही जन्म और मृत्यु के प्रमाणपत्र मिल जाएंगे। उन्हें स्थानीय निकाय के कार्यालयों में नहीं भटकना पड़ेगा। केंद्र सरकार के निर्देश पर प्रदेश में एक मई से नई व्यवस्था लागू हो गई है।
सिविल अस्पतालों में भी जल्द ये सुविधा शुरू करने की तैयारी है। राजधानी शिमला में कमला नेहरू अस्पताल, दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल (डीडीयू) और आईजीएमसी को जिम्मा सौंपा गया है। बता दें कि सर्टिफिकेट उन्हें ही दिए जाएंगे जिनका जन्म या मृत्यु सरकारी अस्पतालों में हुई है।
निजी अस्पताल या घर पर जन्म व मृत्यु पर पुरानी ही व्यवस्था रहेगी। उन्हें स्थानीय निकाय में ही पंजीकरण कराना होगा। राजधानी के तीन बड़े अस्पतालों और जिला अस्पतालों में चिकित्सा अधीक्षकों को रजिस्ट्रार की शक्तियां दी गई हैं।
ऑनलाइन भी जारी होंगे प्रमाण पत्र
अस्पताल में ऑनलाइन और मैन्यूल दोनों तरह के प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इससे लोगों को एक सर्टिफिकेट के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर काटने नहीं पड़ेंगे। इससे शहरों की जन्म और मृत्यु दर के आंकड़ों की वास्तविक स्थिति भी जल्द उपलब्ध हो जाएगी।
यह है पुरानी व्यवस्था
हिमाचल के अस्पतालों में भर्ती होने से लेकर डिस्चार्ज होने तक केवल मां का मेडिकल रिपोर्ट दिया जाता था। बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र नगर निगम, नगर परिषद या नगर पंचायत में आवेदन के बाद मिलता था। 21 दिन के भीतर जन्म प्रमाण पत्र मुफ्त बनते हैं। इसके बाद शुल्क लगता है।
बड़े अस्पतालों में एक मई के बाद के जन्म, मृत्यु प्रमाणपत्र ऑनलाइन जारी करने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। जल्द ही नई व्यवस्था के तहत काम किया जाएगा। सभी अस्पतालों को नए आदेशों से अवगत करवा दिया है। एक मई से पहले के प्रमाणपत्र नगर निकाय ही जारी करेंगे। - डा. डीएस गुरंग, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं