अब भूकंप आने से पहले मिलेगा पूर्वानुमान, जानिए कैसे
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हिमालय क्षेत्र की भूगर्भीय हलचल पर लगातार नजर रखने के लिए हिमाचल में अठारह स्थानों पर खास मशीनें स्थापित की जा रही हैं। ये मशीनें आंकड़े जुटाएंगी, जिसके आधार पर भूकंप की आशंकाओं को लेकर अनुमान लगाया जा सकेगा।
कौन से क्षेत्र में कब भूकंप आ सकता है, इसका पूर्वानुमान जारी हो सकेगा।भू-विज्ञान मंत्रालय के एक प्रोजेक्ट पर आईआईटी कानपुर और एनजीआरआई (नेशनल जीओ फिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट) हैदराबाद काम कर रहे हैं।
योजना के तहत भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील प्रदेशों हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में जमीन के नीचे की हलचल की जानकारी के लिए मशीनें स्थापित की जा रही हैं। हिमाचल में चिह्नित 18 स्थानों में से अब तक किन्नौर, सिरमौर और कांगड़ा जिलों में आधा दर्जन जगह मशीनें स्थापित कर दी गई हैं।
मशीनें ऐसे रखेंगी भूकंप पर नजर
आगामी दिनों में चंबा को कवर किया जाएगा। खास बात यह है कि मशीनें आगामी 50 वर्षों तक मध्य हिमालय क्षेत्र की जमीन में भूमि की सतह पर टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल पर नजर रखेंगी।
मशीन के ऊपर लगा एंटीना सैटेलाइट से आईआईटी कानपुर में पूरी जानकारी उपलब्ध करवाएगा।
इसके अतिरिक्त कुछ स्थानों पर जमीन के नीचे लोहे की रॉड रखी जाएगी और चार-पांच माह के बाद इस रॉड से भी मशीन के माध्यम से जानकारी हासिल होगी। प्रोजेक्ट का कार्य देख रहे आईआईटी कानपुर के राजीव ने बताया कि अब तक हिमाचल में 6 मशीनों की स्थापना की जा चुकी है।
कांगड़ा में 1905 और नेपाल में 2015 में आए भूकंप का केंद्र हिमालय क्षेत्र ही रहा है। इसी को देखते हुए मशीनों की स्थापना के लिए पहले चरण में हिमालय क्षेत्र के समीप के स्थानों को चिह्नित किया गया है।