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Shimla News: राजधानी में ढाबों के बेकार तेल से तैयार होगा अब बायो डीजल
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खाद्य सुरक्षा विभाग की योजना के लिए शहर के कारोबारी तैयार, व्यापार मंडल ने जताई सहमति
तीन बार इस्तेमाल हो चुके तेल को बेच सकेंगे कारोबारी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में पकौड़े और समोसों समेत अन्य उत्पादों को तलने के बाद बेकार फेंके जाने वाले तेल से अब बायो डीजल तैयार किया जाएगा।
खाद्य सुरक्षा विभाग की इस योजना के लिए शहर के कारोबारियों ने हामी भर दी है। अब जल्द ही इसे राजधानी में लागू किया जा सकता है। विभाग ने हाल ही में इस योजना पर शहर के कारोबारी नेताओं के साथ बैठक बुलाई थी। इसके बाद शिमला व्यापार मंडल ने सभी कारोबारियों से इस पर सुझाव लिए हैं। इसमें ज्यादातर कारोबारी इस योजना में सहयोग देने के लिए मान गए हैं। ऐसे में व्यापार मंडल अब अगली बैठक में इस योजना को जल्द लागू करने के लिए बात करेगा। खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार समोसे, पकौड़े समेत कई खाने पीने की चीजों को तलने के लिए डाला जाने वाला तेल तीन बार से ज्यादा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। ऐसा करने से यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बन जाता है।
शहर के कई कारोबारी इस बचे हुए तेल को बेकार फेंक देते हैं। अब कारोबारी इस बचे हुए तेल को जमा कर पैसा कमा सकते हैं। विभाग इन कारोबारियों से 30 रुपये प्रति लीटर की दर से यह तेल खरीदेगा। इससे बायो डीजल बनाया जाएगा।
तेल के लिए कारोबारियों को मिलेंगे कंटेनर
शिमला व्यापार मंडल के अनुसार राजधानी में 130 से ज्यादा कारोबारी ऐसे हैं जिनका कारोबार इससे जुड़ा है। शिमला व्यापार मंडल के महासचिव नितिन सोहल ने कहा कि कारोबारियों ने विभाग से तेल रखने के लिए कंटेनर मांगें हैं। साथ ही विभाग को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि दुकानों से नियमित तौर पर यह तेल ले जाना होगा। सह सचिव तरुण राणा ने कहा कि कारोबारी इस योजना से जुड़ने के लिए तैयार है। इससे कारोबारियों को फायदा होगा।
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तेल से बनता है बायो डीजल
बायो डीजल एक वैकल्पिक ईंधन है जो पारंपरिक डीजल जैसा ही माना जाता है। वनस्पति तेल के अलावा खाना पकाने के तेल से भी इसका उत्पादन किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल डीजल इंजनों में ईंधन के रूप में किया जा सकता है। हालांकि ज्यादातर इस्तेमाल बॉयलर या भट्ठियों में किया जा सकता है।
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तीन बार इस्तेमाल हो चुके तेल को बेच सकेंगे कारोबारी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में पकौड़े और समोसों समेत अन्य उत्पादों को तलने के बाद बेकार फेंके जाने वाले तेल से अब बायो डीजल तैयार किया जाएगा।
खाद्य सुरक्षा विभाग की इस योजना के लिए शहर के कारोबारियों ने हामी भर दी है। अब जल्द ही इसे राजधानी में लागू किया जा सकता है। विभाग ने हाल ही में इस योजना पर शहर के कारोबारी नेताओं के साथ बैठक बुलाई थी। इसके बाद शिमला व्यापार मंडल ने सभी कारोबारियों से इस पर सुझाव लिए हैं। इसमें ज्यादातर कारोबारी इस योजना में सहयोग देने के लिए मान गए हैं। ऐसे में व्यापार मंडल अब अगली बैठक में इस योजना को जल्द लागू करने के लिए बात करेगा। खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार समोसे, पकौड़े समेत कई खाने पीने की चीजों को तलने के लिए डाला जाने वाला तेल तीन बार से ज्यादा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। ऐसा करने से यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बन जाता है।
शहर के कई कारोबारी इस बचे हुए तेल को बेकार फेंक देते हैं। अब कारोबारी इस बचे हुए तेल को जमा कर पैसा कमा सकते हैं। विभाग इन कारोबारियों से 30 रुपये प्रति लीटर की दर से यह तेल खरीदेगा। इससे बायो डीजल बनाया जाएगा।
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तेल के लिए कारोबारियों को मिलेंगे कंटेनर
शिमला व्यापार मंडल के अनुसार राजधानी में 130 से ज्यादा कारोबारी ऐसे हैं जिनका कारोबार इससे जुड़ा है। शिमला व्यापार मंडल के महासचिव नितिन सोहल ने कहा कि कारोबारियों ने विभाग से तेल रखने के लिए कंटेनर मांगें हैं। साथ ही विभाग को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि दुकानों से नियमित तौर पर यह तेल ले जाना होगा। सह सचिव तरुण राणा ने कहा कि कारोबारी इस योजना से जुड़ने के लिए तैयार है। इससे कारोबारियों को फायदा होगा।
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तेल से बनता है बायो डीजल
बायो डीजल एक वैकल्पिक ईंधन है जो पारंपरिक डीजल जैसा ही माना जाता है। वनस्पति तेल के अलावा खाना पकाने के तेल से भी इसका उत्पादन किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल डीजल इंजनों में ईंधन के रूप में किया जा सकता है। हालांकि ज्यादातर इस्तेमाल बॉयलर या भट्ठियों में किया जा सकता है।