56 शिक्षण संस्थानों को भेजे थे नोटिस, इनका नहीं आया जवाब
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सरकारी नियमों की अनदेखी करने के आरोप में उच्च शिक्षा निदेशालय से जारी कारण बताओ नोटिस का 25 निजी शिक्षण संस्थानों ने जवाब नहीं दिया है। निदेशालय ने 56 निजी शिक्षण संस्थानों को कारण बताओ नोटिस देकर 31 मई तक जवाब देने को कहा था। नोटिस के माध्यम से पूछा गया था कि क्यों न इन संस्थानों को जारी अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) वापस ले लिए जाए।
उच्च शिक्षा निदेशालय के पास 31 मई तक 31 निजी संस्थानों के ही जवाब आए हैं। निदेशालय इन जवाबों को लेकर अब रिपोर्ट बनाने में जुट गया है। यह रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंपी जाएगी। संस्थानों को दी एनओसी वापस लेने का फैसला प्रदेश सरकार लेगी।
सरकार से एनओसी मिलने के बाद ही इन संस्थानों को ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजूकेशन और नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजूकेशन से मान्यता मिलती है। सरकार अगर इन संस्थानों से एनओसी वापस ले लेती है तो इनकी मान्यता पर भी संकट गहरा जाएगा। मान्यता खत्म होने पर उक्त सभी संस्थान बंद हो जाएंगे।
सरकार को दी जाएगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट द्वारा निजी शिक्षण संस्थानों की कमियों को तलाशने के लिए गठित एसआईटी ने अप्रैल महीने में हिमाचल हाईकोर्ट में अपनी सातवीं स्टेटस रिपोर्ट पेश की है। रिपोर्ट में प्रदेश में स्थित 159 निजी शिक्षण संस्थानों को विभिन्न नियमों की अवहेलना करने का आरोपी पाया गया है।
रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए सरकार ने बीते दिनों ही 44 संस्थानों पर एफआईआर करने और 159 संस्थानों से एसआईटी का जांच खर्च वसूलने के आदेश दिए हैं। इसी कड़ी में उच्च शिक्षा निदेशालय ने 56 संस्थानों को सरकार द्वारा दी गई एनओसी वापस लेने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
उधर, संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा अमरजीत शर्मा ने बताया कि कुछ संस्थानों ने डाक के माध्यम से भी जवाब भेजे हैं। एक-दो दिन का इंतजार करने के बाद रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेज दी जाएगी।