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Shimla News: होटलों के पर्यावरण अनुपालना के एनओसी के 150 मामले लंबित
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आचार संहिता लगने के कारण प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जारी नहीं कर रहा एनओसी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी में होटलों को पर्यावरण अनुपालन के लिए जारी किए जाने वाले एनओसी के प्रदेश नियंत्रण बोर्ड के पास 150 से ज्यादा मामले लंबित हैं। इनमें कुछ आवेदन नए और कुछ पुराने एनओसी के नवीनीकरण के आवेदन हैं। आदर्श चुनाव आचार संहिता लगने के कारण बोर्ड लोगों को एनओसी जारी नहीं कर रहा है। बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि चुनावों के बाद ही एनओसी जारी किए जाएंगे।
शहर में होटलों को चलाने के लिए प्रदेश प्रदूषण बोर्ड से एनओसी लेना अनिवार्य है। नए एनओसी के लिए टीसीपी और पंचायत से नोटिस लेना होता है जिसमें गीले और सूखे कूड़े के निपटारे की जानकारी देना जरूरी है। बोर्ड एक, दो और पांच साल के लिए एनओसी जारी करता है। होटल मालिकों को संचालन के लिए सहमति का नवीनीकरण लेना आवश्यक है। होटल की श्रेणी और उसके पैमाने के अनुसार जल अधिनियम, 1974 और वायु अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के तहत दोबारा से एनओसी के लिए आवेदन करना पड़ता है। आम तौर पर राजधानी के होटल मालिक 31 मार्च के आसपास एनओसी के लिए आवेदन करते हैं। 16 मार्च को आदर्श चुनाव आचार संहिता लगने के बाद से बोर्ड एनओसी जारी नहीं कर रहा है।
शहर में प्रदूषण नियमों का सख्ती से पालन हो और होटल कचरे का सही से निपटारा हो, इसके लिए होटलों के लिए एनओसी लेना जरूरी है। एनओसी न होने पर होटल मालिकों को यह डर सता रहा है कि उन्हें होटल का संचालन करने से रोक न दिया जाए। प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ललित ठाकुर ने बताया कि बोर्ड के पास एनओसी के 150 से ज्यादा मामले लंबित हैं। बोर्ड चुनावों के बाद ही नए एनओसी जारी करेगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी में होटलों को पर्यावरण अनुपालन के लिए जारी किए जाने वाले एनओसी के प्रदेश नियंत्रण बोर्ड के पास 150 से ज्यादा मामले लंबित हैं। इनमें कुछ आवेदन नए और कुछ पुराने एनओसी के नवीनीकरण के आवेदन हैं। आदर्श चुनाव आचार संहिता लगने के कारण बोर्ड लोगों को एनओसी जारी नहीं कर रहा है। बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि चुनावों के बाद ही एनओसी जारी किए जाएंगे।
शहर में होटलों को चलाने के लिए प्रदेश प्रदूषण बोर्ड से एनओसी लेना अनिवार्य है। नए एनओसी के लिए टीसीपी और पंचायत से नोटिस लेना होता है जिसमें गीले और सूखे कूड़े के निपटारे की जानकारी देना जरूरी है। बोर्ड एक, दो और पांच साल के लिए एनओसी जारी करता है। होटल मालिकों को संचालन के लिए सहमति का नवीनीकरण लेना आवश्यक है। होटल की श्रेणी और उसके पैमाने के अनुसार जल अधिनियम, 1974 और वायु अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के तहत दोबारा से एनओसी के लिए आवेदन करना पड़ता है। आम तौर पर राजधानी के होटल मालिक 31 मार्च के आसपास एनओसी के लिए आवेदन करते हैं। 16 मार्च को आदर्श चुनाव आचार संहिता लगने के बाद से बोर्ड एनओसी जारी नहीं कर रहा है।
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शहर में प्रदूषण नियमों का सख्ती से पालन हो और होटल कचरे का सही से निपटारा हो, इसके लिए होटलों के लिए एनओसी लेना जरूरी है। एनओसी न होने पर होटल मालिकों को यह डर सता रहा है कि उन्हें होटल का संचालन करने से रोक न दिया जाए। प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ललित ठाकुर ने बताया कि बोर्ड के पास एनओसी के 150 से ज्यादा मामले लंबित हैं। बोर्ड चुनावों के बाद ही नए एनओसी जारी करेगा।
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