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सात दशक बाद भी सड़क नहीं, स्वतंत्रता सेनानी को पीठ पर उठाकर अस्पताल ले जाता है बेटा

Wed, 18 Dec 2019 12:36 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, घुमारवीं (बिलासपुर)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, घुमारवीं (बिलासपुर) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Wed, 18 Dec 2019 12:36 PM IST
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No road connectivity to freedom fighter home after seven decades in bilaspur himachal pradesh
- फोटो : अमर उजाला

आजादी के सात दशक बाद भी स्वतंत्रता सेनानी के घर तक सड़क नहीं पहुंची है। घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र के करलोटी गांव निवासी स्वतंत्रता सेनानी अमरनाथ (91) को बीमारी की स्थिति में उनके बेटे आज भी पीठ पर उठाकर करीब 200 मीटर दूर सड़क तक पहुंचाते हैं।

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अमरनाथ के परिजनों के अनुसार उन्होंने जिला प्रशासन से लेकर प्रदेश सरकार तक कई बार यह समस्या उठाई, लेकिन आश्वासनों के सिवाय कुछ भी हासिल नहीं हुआ। यहां तक कि जनमंच कार्यक्रम में भी सड़क का मुद्दा उठाया गया, लेकिन सरकार कुछ नहीं कर पाई। 
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फायर विभाग से सेवानिवृत्त हुए स्वतंत्रता सेनानी के बड़े बेटे भूपेंद्र पाल डोगरा ने बताया कि सरकार यूं तो विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
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उन्होंने कहा कि वे कई बार नेताओं से भी सड़क सुविधा की गुहार लगा चुके हैं। पूर्व कांग्रेस विधायक राजेश धर्माणी और वर्तमान भाजपा विधायक राजेंद्र गर्ग से भी सड़क से 200 मीटर की दूरी तक संपर्क सड़क बनाने की व्यक्तिगत तौर से गुहार लगाई, लेकिन आश्वासन ही मिले।

अमरनाथ को स्वास्थ्य जांच के लिए अस्पताल ले जाने वाले उनके बेटे राजकुमार ने कहा कि सड़क न होने से उन्हें रात को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। घुमारवीं के विधायक राजेंद्र गर्ग ने कहा कि मामला उनके ध्यान में है।

200 मीटर सड़क के निर्माण के लिए संबंधित विभाग को शीघ्र एस्टीमेट बनाने के निर्देश दिए हैं। पांच लाख रुपये भी स्वीकृत कर दिए गए हैं। पंचायत प्रधान कृष्ण धीमान ने कहा कि उक्त परिवार को सड़क सुविधा मिलना जरूरी है। उधर, उपायुक्त बिलासपुर राजेश्वर गोयल ने कहा कि सड़क की समस्या का जल्द समाधान किया जाएगा। 

जल्द काम शुरू न हुआ तो पत्नी के साथ धरना दूंगा : अमरनाथ 
वृद्ध स्वतंत्रता सेनानी अमरनाथ डोगरा ने कहा कि उन्होंने अपना जीवन देश के लिए कुर्बान कर दिया, लेकिन आज सरकारें उनकी सुध लेने से भी संकोच कर रही हैं। उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि 2 सप्ताह के भीतर सड़क बनाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई गई वे पत्नी रामप्यारी के साथ उपायुक्त कार्यालय के समक्ष धरना देंगे।

स्वतंत्रता सेनानी अमरनाथ डोगरा प्रजा मंडल में शामिल थे। उन्हें स्थानीय राजा की ओर से अपनी रियासत से बाहर रहने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कांगड़ा के उस समय के प्रजा मंडल के अग्रणी सेनानी अधिवक्ता हीरालाल के साथ आजादी के लिए योगदान दिया था।

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