मुख्यमंत्री राहत कोष में पहेली बने सवा पांच लाख रुपये
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पिछली सरकारों के कार्यकाल में मुख्यमंत्री राहत कोष का लेखाजोखा ठीक से नहीं रखा गया। चार साल में मुख्यमंत्री राहत कोष में करीब सवा पांच लाख रुपये कहां से आए, इसका सुराग ही नहीं लग पा रहा है। यह अभी रहस्य ही बना हुआ है। यह खुलासा ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है।
इससे पहले के वर्षों की लेखा परीक्षा में भी ऐसे ही कई मामले सामने आ चुके हैं। हाल ही में स्थानीय लेखा विभाग के उपनिदेशक ने इस बारे में अपनी लेखा रिपोर्ट को उच्च अधिकारियों के ध्यान में लाया है। इसकी जानकारी सामान्य प्रशासन विभाग को भी दी गई है।
इस रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री राहत कोष की रोकड़ बही के ऑडिट में पाया गया है कि इसमें 5,22,050 रुपये की प्राप्ति दर्शाई गई है, मगर यह धनराशि कहां से और किससे प्राप्त की गई इसका विवरण नहीं दिया गया है।
पूर्व के एक अंकेक्षण प्रतिवेदन में भी इस बारे में आपत्ति दर्ज की गई है। उधर, मुख्य सचिव बीके अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री राहत कोष के मामले सामान्य प्रशासन विभाग देखता है। वह प्रदेश से बाहर हैं। शिमला आने के बाद ही इस बारे में कोई बात कर पाएंगे।