बिना हस्ताक्षर शिकायत पर प्रधानों के खिलाफ नहीं होगी घपलों की जांच
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ग्राम पंचायतों में घोटालों की जांच न करने के पंचायती राज विभाग के अनोखे फरमान जारी कर दिए हैं। घोटाले की शिकायत में हस्ताक्षर नहीं होंगे तो पंचायत प्रधानों, उपप्रधानों और अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ घपलों की जांच नहीं होगी। यानी गंभीर घोटालों की शिकायत भी अगर कोई बगैर अपना नाम दिए शिकायत करे तब भी विभागीय अधिकारी इसकी कोई जांच नहीं करेंगे।
यह अनोखे आदेश राज्य पंचायती राज विभाग के निदेशक के हवाले से सभी संबंधित अधिकारियों को जारी किए गए हैं। इन आदेशों में कहा गया है कि ऐसा प्रदेश पंचायती राज नियमावली को ध्यान में रखकर किया गया है। जिला पंचायत अधिकारी कैसे जांच करेंगे, इसका भी उन्हें प्रारूप जारी किया है।
यह नए आदेश चार दिन पहले ही पंचायती राज विभाग निदेशक की ओर से जारी हुए हैं। आदेशों की प्रति जिला पंचायत अधिकारियों के अलावा संयुक्त सचिव ग्रामीण विकास, उप नियंत्रक वित्त एवं लेखा, ग्रामीण विकास अभिकरण के समस्त परियोजना अधिकारियों को भी भेजी गई है।
इन्हें पंचायती राज प्रशिक्षण संस्थान के सभी प्राचार्यों को भी प्रेेषित किया है। जांच की प्रक्रिया के 21 बिंदु हैं, जिनमें कहा गया है कि आरोपों को भलीभांति पढ़ा जाए। शिकायत पत्र में यह सुनिश्चित करें कि शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर हैं या नहीं, क्योंकि पंचायती राज सामान्य नियमावली 1997 के नियम 142(2) के अनुसार जब तक शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर नहीं होंगे और स्पष्ट आरोप नहीं दर्शाए होंगे, तब तक कोई जांच अमल में न लाई जाए।
इसके अलावा छानबीन की प्रक्रिया आगे बढ़ाते हुए दोनों पक्षों को 15 दिन में नोटिस जारी करें। इस नोटिस में जांच की तिथि, समय और स्थान का ब्योरा हो। जांच के दिन सभी पक्षों की उपस्थिति अनिवार्य है।
निदेशक पंचायती राज ने ये आदेश विजिलेंस मैनुअल के अनुसार जारी किए हैं। जांच इसी मैनुअल को ध्यान में रखते हुए की जा सकती है। - डा. आरएन बत्ता, सचिव, पंचायत राज