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लेटलतीफी की हद, पौधों के इंतजार में ही बीत गया सीजन
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Mon, 24 Mar 2014 03:23 PM IST
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हिमाचल के हजारों बागवान को एक साल बाद भी सेब और दूसरे फलदार पौधों की अत्याधुनिक विदेशी किस्में नहीं मिल पाई है। यूनिवर्सल टेंडर प्रक्रिया के बाद भी सरकारी स्तर पर ये पौधे नहीं पहुंच पाए हैं। इस साल अब पौधरोपण का समय बीत गया है। अब आएं भी तो कोई फायदा नहीं होगा।
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विभाग ने सेब सहित पांच फलों के विदेशी पौधों के आयात के टेंडर किए थे। ये ग्लोबल टेंडर 20 दिसंबर तक मांग लिए गए थे। इन्हें 21 दिसंबर को खोला जाना था, लेकिन इसमें कंपनियों के अधूरे दस्तावेजों के कारण देरी हो गई। हालांकि, इन्हें बाद में जनवरी में खोल दिया गया।
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टेंडर प्रक्रिया में कोई विदेशी कंपनी सामने नहीं आई। भारत की ही तीन फर्मों ने आवेदन किए। इन्होंने कहा कि इस साल सारे पौधे नहीं मंगवाए जा सकेंगे। पहले विभाग ने दावा किया था कि इसी साल से ये पौधे बागवानों को दिए जाएंगे लेकिन सारी प्रक्रिया इतनी सुस्त रही कि पौधे मिल ही नहीं पाए।
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ये किस्में मंगवाई जानी थीं
अमेरिका, यूरोप आदि से सेब की 12 आधुनिक किस्में सुपर चीफ, रेड वीलोक्स, जेरोमाइन, गालावैल, गेल गाला, एडम्स एप्पल, स्कारलेट स्पर 2, एंब्रोसिया, इडारेड डिलिशयस मंगवाई जानी थीं। लो चिलिंग किस्में जैसे डोरसेट गोल्डन और आइन शेमर भी मंगवाई जानी थीं। सेब के कुल 25000 पौधों को मंगवाया जाना था।
साथ ही 50 हजार कलमें भी मंगवाई जानी थीं। नाशपाती की पांच किस्में कोनकोर्ड, कैनाल रेड, पैकहेम्स, ट्रिंफ और कारमेन लाई जानी थीं। चेरी की चार, वालनट की तीन और स्ट्राबेरी रनर्स की पांच किस्में मंगवाई जानी थीं। सप्लाई तो नहीं आई, मगर इन्हें लगाने का सीजन जरूर बीत गया।