नूरपुर हादसा: तकनीकी एक्सपर्ट के बजाय खुद हादसे की जांच में जुटे अधिकारी
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नूरपुर बस हादसे की जांच को लेकर सरकार कितनी संजीदा है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सड़कों की हालात सुधारने की जिम्मेदारी संभालने वाले विभागों को ही जांच का जिम्मा सौंपा है। आम तौर पर सूबे में किसी हादसे या अपराध के घटित होने के समय मौके पर फोरेंसिक एक्सपर्ट की टीम जरूर बुलाई जाती है।
पुलिस भी इन्हीं की रिपोर्ट के आधार पर चालान तैयार कर कोर्ट में पेश करती है। लेकिन, यह शायद पहली बार होगा, जब 24 से ज्यादा मासूमों की मौत होने के बावजूद हादसे के कई दिन बाद भी फोरेंसिक एक्सपर्ट मौके पर नहीं बुलाए गए। हाल यह है कि एडीसी की अध्यक्षता में मजिस्ट्रेटी जांच कराई जा रही है।
फोरेंसिक विशेषज्ञों को नहीं बुलाया
इसमें पीडब्ल्यूडी के तकनीकी सहायकों की मदद ली जा रही है। फोरेंसिक लैब शिमला के निदेशक अरुण शर्मा ने बताया कि जब तक जांच एजेंसी को जरूरत न हो, तब तक न तो टीम को बुलाया जाता है और न टीम जाती है।
खास बात यह है कि इतने बड़े हादसे में भी फोरेंसिक विशेषज्ञों को नहीं बुलाया गया, जबकि बद्दी और अन्य जगह कई ऐसे छोटे हादसे हुए हैं, जिनमें विशेषज्ञ रिपोर्ट के लिए फोरेंसिक एक्सपर्ट को बुलाया गया। उन मामलों में उन्होंने घटना को बाकायदा री क्रीएट किया और फिर उसके बाद अपनी रिपोर्ट सौंपकर कारण स्पष्ट किए।