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कोल्ड स्टोर न होने से हर साल बरबाद हो जाती है 30 फीसदी फसल
Fri, 24 Jan 2020 12:11 PM IST
अरविन्द ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Fri, 24 Jan 2020 12:11 PM IST
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फाइल फोटो
बागवानों को बगीचों के पास छोटे कोल्ड स्टोर की सुविधा नहीं मिल रही है। उपयुक्त क्षमता के कोल्ड स्टोर नहीं होने से प्रदेश के किसानों और बागवानों को फसल मंडियों में तुरंत बेचनी पड़ रही हैं। प्रदेश में हर साल बागवानों की 25 से 30 फीसदी तक तैयार फसल मंडियों में बेचने से पहले खराब हो जाती है।
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सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में प्रदेश में बागवानों की कुल तैयार फसल की सात फीसदी ही फसल को कोल्ड स्टोर में भंडारण करने की व्यवस्था है। जबकि मंडियों में समय पर फसलें न बिकने के कारण नष्ट हो जाती है।
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इससे प्रदेश के बागवानों को हर साल करोड़ों की क्षति उठानी पड़ती है। बागवान लंबे समय से फसलों को भंडारण के लिए गांवों के पास छोटे कोल्ड स्टोर और फल विधायन यूनिटों को स्थापित करने की मांग करते रहे हैं।
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प्रदेश फल और सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान ने कहा कि बागवानों की हर साल तीस फीसदी से ज्यादा फसल मंडियों में पहुंचने से पहले ही खराब हो जाती है। बागवानों को फसलों के नुकसान से बचाने के लिए गांवों के पास छोटे कोल्ड स्टोर, पैकिंग ग्रेडिंग और विधायन यूनिटों को स्थापित करने की जरूरत है।