हिमाचल को करोड़ों का झटका देगा नीति आयोग
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योजना आयोग की जगह आया मोदी सरकार का नीति आयोग हिमाचल को 1400 करोड़ का झटका दे सकता है। राज्य के वित्त महकमे के लिए ये मुश्किल वक्त है। चालू वित्त वर्ष का एनुअल प्लान अभी तक मंजूर नहीं है और अगले साल से पहले अब योजना आयोग बदल गया। मोदी सरकार ने फंड एलोकेशन का काम योजना आयोग से वित्त मंत्रालय को दे दिया है।
मंत्रालय तय फार्मूले से फंडिंग करता है, जबकि योजना आयोग हिमाचल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, सिक्किम और 7 नार्थ-ईस्ट राज्यों को अलग तरीके से फंड देता था। 1969 के गाडगिल फार्मूले के तहत इन राज्यों को नार्मल सेंट्रल असिस्टेंस (एनसीए) के साथ स्पेशल प्लान असिस्टेंस और स्पेशल सेंट्रल असिस्टेंस दी जाती थी।
22800 करोड़ मंजूर होंगे या नहीं
हिमाचल को 2012-13 में 1400, 2013-14 में 1350 करोड़ रुपये इन दो मदों में मिले थे। एनसीए फार्मूले से तय होती थी, जबकि विशेष केंद्रीय मदद को लेकर राज्यों के पास लाबिंग या बार्गेनिंग का विकल्प था। अब यदि वित्त मंत्रालय को फंड जारी करना है तो ये पैसा नहीं मिलेगा। इसके बदले केंद्र सरकार किस रूप में विशेष श्रेणी राज्यों की मदद करेगी, ये तय नहीं है।
वित्त विभाग अगले बजट से पहले वित्त वर्ष 2015-16 के लिए वार्षिक योजना को 4800 करोड़ करना चाह रहा है, लेकिन केंद्र सरकार से इस बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं है। वहीं, वर्ष 2014-15 से शुरू 12वीं पंचवर्षीय योजना में हिमाचल के लिए 22800 करोड़ साइज तय है, लेकिन यदि एनुअल प्लान मंजूर नहीं होगा या नहीं बढ़ेगा, तो ये लक्ष्य भी पूरा नहीं होगा।
4400 करोड़ की योजना अब तक मंजूर नहीं
प्रदेश का खजाना संभाल रहे वित्त एवं योजना विभागों में असमंजस का हाल यह है कि इस साल की 4400 करोड़ की वार्षिक योजना अब तक मंजूर नहीं हुई है। इसे योजना विभाग की वेबसाइट से भी हटा दिया गया है। अब 23-24 जनवरी को शिमला में विधायक प्राथमिकता बैठकें हो रही हैं, लेकिन इन्हें बजट डिस्कशन का नाम दिया गया है, क्योंकि अगले प्लान का भी कुछ तय नहीं है।
दिल्ली जा रहे वित्त सचिव- कैबिनेट के लिए मंगलवार को धर्मशाला पहुंचे वित्त विभाग के प्रधान सचिव डा. श्रीकांत बाल्दी वार्षिक प्लान की स्थिति साफ करने के लिए बुधवार को दिल्ली जा रहे हैं। वे नीति आयोग के नए उपाध्यक्ष अरविंद पनगढि़या या उनके सीईओ से मिल सकते हैं। डा. बाल्दी ने बताया कि अब तक दो बैठकें नीति आयोग को लेकर हुई हैं। दोनों में हिमाचल ने अपनी चिंताएं रखी हैं।
उम्मीद है केंद्र सरकार न्याय करेगी
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि केंद्र सरकार हिमाचल से न्याय करेगी। योजना आयोग को खत्म करने के प्रस्ताव का इसलिए उन्होंने विरोध किया था, क्योंकि विशेष श्रेणी राज्यों के लिए आयोग साफ्ट था।
उनके मन में केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करने की इच्छा है। राज्य सरकार अपना पक्ष नीति आयोग में रखेगी। धन में कमी नहीं होने देंगे। अगर केंद्र सरकार हमारी बात नहीं मानती है तो इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचेगा।