एनएचएआई ने पिंजौर-बद्दी फोरलेन में जमीन के रेट पर जताई आपत्ति
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नेशनल हाईवे अथारिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने पिंजौर- नालागढ़- बद्दी फोरलेन में जाने वाली भूमि के रेट पर आपत्ति जताई है। फोरलेन में भूमि के रेट को लेकर बात नहीं बनी है।
एनएचएआई ने पिंजौर, नालागढ़ और बद्दी फोरलेन बनाने के लिए भूमि के रेट को लेकर आपत्ति की है। प्राधिकरण ने फोरलेन में जाने वाली भूमि का रेट कम करने को कहा है, ताकि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आरंभ की जा सके।
फोरलेन में जा रही जमीन के दाम हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में काफी ज्यादा तय किए हैं जबकि एनएचएआई इन दामों पर भूमि का मुआवजा देने के लिए राजी नहीं है। भूमि के दामों को लेकर प्राधिकरण के अधिकारियों की एक बैठक संबंधित जिलाधीशों के साथ हो चुकी है लेकिन दोनों पक्षों में फिलहाल सहमति नहीं हो पाई है।
क्या कहते हैं एनएचएआई के अधिकारी
नेशनल हाईवे अथारिटी ऑफ इंडिया एनएचएआई के अधिकारी बताते हैं कि पिंजौर- नालागढ़- बद्दी फोरलेन में जाने वाली जमीन के रेट तय होने के बाद भूमि अधिग्रहण का काम चालू होगा। अभी भूमि के रेट तय नहीं हो पाए हैं।
संबंधित क्षेत्रों के डीसी से बैठक में भूमि के बताए रेट काफी ज्यादा हैं। भूमि के रेट कम करने को कहा गया है ताकि फोरलेन में जाने वाले भूमि का अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू हो सके। इसके बाद ही फोरलेन की टेंडर प्रक्रिया आरंभ होगी।
सीमा तक पहुंचाने वाली सड़कों के लिए केंद्र से मांगे 21 करोड़
प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों की सड़कों के लिए 21 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजा गया है। सीमा तक पहुंचने के लिए ये सड़कें अहम माना जाती हैं और इनकी समय पर मरम्मत की जानी अनिवार्य हैं। वर्ष 2006 के बाद यह मद जनजातीय उप योजना का ही हिस्सा बना दिया गया था।
जनजातीय क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण के लिए राज्य सरकार ने कुल 21 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार कर केंद्र सरकार की मजूरी के लिए भेजा है। इससे किन्नौर और लाहौल-स्पीति की सड़कों की हालत सुधारी जानी हैं। अभी तक बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्लान (बीएडीपी) में सड़कें बनाने और मरम्मत का काम किया जाता रहा है।
पड़ोसी देश चीन की सीमा से सटे मार्गों के लिए बीएडीपी के में केंद्र सरकार धनराशि मुहैया करवाती रही है लेकिन अब यह राशि बंद कर दी गई है। इस कारण से राज्य सरकार ने किन्नौर और लाहौल-स्पीति क्षेत्र की उन सड़कों के लिए 21 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर भेजा है, यहां से सीमा तक पहुंचा जा सकता है।
कृषि एवं जनजातीय विकास मंत्री डॉ. राम लाल मारकंडा ने बताया कि किन्नौर और लाहौल-स्पीति की पड़ोसी देश चीन सीमा तक पहुंचने वाली सड़कें बनाने और सड़कों की मरम्मत के लिए राज्य सरकार ने 21 करोड़ का प्रोजेक्ट केंद्र सरकार के पास स्वीकृति के लिए भेजा है।
प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में पहले वर्ष 1998 से 2002 तक बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्लान (बीएडीपी) में सड़कें बनाने और मरम्मत का काम किया जाता था। इसके बाद यह कार्य जनजातीय उपयोजना में किया जाने लगा।