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Shimla News: मूल अलाइनमेंट में बदलाव की जांच के लिए एनएचएआई नहीं कर रही सहयोग
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बिलासपुर। किरतपुर-नेरचौक फोरलेन की मूल अलाइनमेंट प्लान में हुए बदलाव का राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण असल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करवा रहा है। यह रिपोर्ट तहसीलदार स्वारघाट विपिन ठाकुर ने एसडीएम स्वारघाट को दी है।
किरतपुर-नेरचौक अप्रूव्ड रोड अलाइनमेंट प्लान में हुए बदलाव की जांच रिपोर्ट न भेजने पर एसडीएम स्वारघाट ने तहसीलदार स्वारघाट को दूसरा रिमाइंडर जारी किया था। इससे पहले भी एसडीएम ने तहसीलदार को पत्र जारी किया था। लेकिन उसपर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उसके बाद एसडीएम ने इस रिपोर्ट के लिए दोबारा रिमाइंडर भेजा था। जिस पर अब तहसीलदार ने यह जवाब दिया है। बताते चलें कि किरतपुर-नेरचौक फोरलेन के भूमि अधिग्रहण में एनएचएआई की विशेष इकाई के राजस्व कर्मियों द्वारा अधिग्रहित की गई भूमि के इंतकालों को केंद्र सरकार के नाम दर्ज कर तस्दीक कर दिया।
आरटीआई से प्राप्त सूचनाओं पर केंद्र सरकार के नाम दर्ज हुए इंतकालों की फोरलेन विस्थापित समिति द्वारा राजस्व कर्मियों से जांच पड़ताल करवाई गई। जिसमें पाया गया कि अधिग्रहित की गई भूमि का रिकॉर्ड पढ़ने योग्य नहीं है। मुसाबी के मीटर दर्ज करने व विभाजित करने से छोड़ दिए हैं। इंतकालों के साथ संलग्न नक्शों का मिलान भूमि अधिग्रहण प्लान से नहीं हो पा रहा है। भू मालिकों की शेष बची निजी भूमि को बिना पैमाइश किए (बाकिमांदा बदस्तूर) रखा है। जिसकी रिपोर्ट एसडीएम ने मांगी थी।
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फोरलेन समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि तीन साल से विचाराधीन शिकायत पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं होने पर समिति ने एसडीएम स्वारघाट से समय सीमा निर्धारित करने की मांग की थी। लेकिन एनएचएआई इसमें अधिकारियों को सहयोग नहीं कर रही है। जोकि निराशाजनक है। कहा कि इसपर जिला प्रशासन को एनएचएआई के प्रति कड़ा संज्ञान लेना चाहिए।
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किरतपुर-नेरचौक अप्रूव्ड रोड अलाइनमेंट प्लान में हुए बदलाव की जांच रिपोर्ट न भेजने पर एसडीएम स्वारघाट ने तहसीलदार स्वारघाट को दूसरा रिमाइंडर जारी किया था। इससे पहले भी एसडीएम ने तहसीलदार को पत्र जारी किया था। लेकिन उसपर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उसके बाद एसडीएम ने इस रिपोर्ट के लिए दोबारा रिमाइंडर भेजा था। जिस पर अब तहसीलदार ने यह जवाब दिया है। बताते चलें कि किरतपुर-नेरचौक फोरलेन के भूमि अधिग्रहण में एनएचएआई की विशेष इकाई के राजस्व कर्मियों द्वारा अधिग्रहित की गई भूमि के इंतकालों को केंद्र सरकार के नाम दर्ज कर तस्दीक कर दिया।
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आरटीआई से प्राप्त सूचनाओं पर केंद्र सरकार के नाम दर्ज हुए इंतकालों की फोरलेन विस्थापित समिति द्वारा राजस्व कर्मियों से जांच पड़ताल करवाई गई। जिसमें पाया गया कि अधिग्रहित की गई भूमि का रिकॉर्ड पढ़ने योग्य नहीं है। मुसाबी के मीटर दर्ज करने व विभाजित करने से छोड़ दिए हैं। इंतकालों के साथ संलग्न नक्शों का मिलान भूमि अधिग्रहण प्लान से नहीं हो पा रहा है। भू मालिकों की शेष बची निजी भूमि को बिना पैमाइश किए (बाकिमांदा बदस्तूर) रखा है। जिसकी रिपोर्ट एसडीएम ने मांगी थी।
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फोरलेन समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि तीन साल से विचाराधीन शिकायत पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं होने पर समिति ने एसडीएम स्वारघाट से समय सीमा निर्धारित करने की मांग की थी। लेकिन एनएचएआई इसमें अधिकारियों को सहयोग नहीं कर रही है। जोकि निराशाजनक है। कहा कि इसपर जिला प्रशासन को एनएचएआई के प्रति कड़ा संज्ञान लेना चाहिए।