{"_id":"85325e563569ce163420f82d8eba1180","slug":"ngt-orders-to-himachal-about-silence-zone-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रदूषण पर एनजीटी ने हिमाचल को दी चेतावनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रदूषण पर एनजीटी ने हिमाचल को दी चेतावनी
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Sun, 13 Dec 2015 10:16 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पहाड़ी राज्य हिमाचल में बदतर होती जा रही हवा और बीमार करने वाले ध्वनि प्रदूषण को लेकर प्रदेश सरकार और प्राधिकरणों को एक बार फिर चेताया है। जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने परमानंद कालंता के मामले का निपटारा करते हुए निर्देश दिए हैं कि कानून और कोर्ट के पूर्व आदेशों का सख्ती से पालन करें।
विज्ञापन
साथ ही हिमाचल सरकार को प्रदेश में तीन महीनों के भीतर साइलेंस जोन की घोषणा करने को कहा है। ग्रीन बेंच ने कहा कि राज्य सरकार और संबंधित मामले में शिमला के भीतर मौजूद सभी प्राधिकरण साइलेंस जोन की घोषणा के साथ उचित स्थानों पर साइन बोर्ड लगाएं।
विज्ञापन
कई बार दिए गए आदेश, पालन नहीं
ग्रीन बेंच ने वायु और ध्वनि प्रदूषण को लेकर राज्य सरकार और प्राधिकरणों को बार-बार दिए गए हाईकोर्ट और ट्रिब्यूनल के आदेशों का पालन करने के लिए चेताया। इनमें हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव, परिवहन विभाग, निगम और अन्य सभी प्राधिकरणों को आदेश दिया गया है कि वे हाईकोर्ट के जरिये संबंधित मामले में 14 अक्तूबर 2011, 30 दिसंबर 2011, 6 जनवरी 2012, 1 जून 2012 और ग्रीन ट्रिब्यूनल के जरिये दिए गए 29 जुलाई 2013 और 20 नवंबर 2014 के आदेशों का सख्ती से पालन करें।
विज्ञापन
शिमला के प्रतिबंधित मार्गों पर प्रवेश न कर पाए कोई वाहन
नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने शिमला में चिंताजनक वायु और ध्वनि प्रदूषण पर रोकथाम के मद्देनजर सरकार और संबंधित प्राधिकरणों को आदेश दिया है कि वे तीन महीनों के भीतर पहले से प्रतिबंधित और यातायात के लिए बंद मार्गों की समीक्षा कर फिर से इस संबंध में अधिसूचना जारी करें। साथ ही अधिसूचना में जिन सड़कों को प्रतिबंधित किया जाए, वहां यह भी सुनिश्चित हो कि किसी भी सूरत में कोई वाहन प्रवेश न कर पाए। जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने प्रेमानंद खांटा की याचिका का निपटारा करते यह आदेश जारी किया है।
ग्रीन बेंच ने कहा कि अधिसूचना में जिन सड़कों पर प्रतिबंध लगाया जाए, वहां पूरी तरह वाहनों के प्रवेश पर मनाही हो। साथ ही इन सड़कों पर पार्किंग जैसी गतिविधियां भी न की जाएं। ग्रीन बेंच ने सरकार को आदेश दिया है कि वह यह तय करे कि शिमला में किसी भी सड़क पर भीड़ या जाम न लगे। साथ ही विशेष रूप से कार्ट रोड पर भी लगने वाले जाम पर विचार करे। बेंच ने आदेश दिया है कि सरकार तीन महीने के भीतर कार्ट रोड को वन-वे ट्रैफिक के लिए बनाए।
माल रोड के वेस्टर्न कमांड, पोस्ट ऑफिस, हाईकोर्ट और अन्य बिंदुओं पर कार लाने वालों से 500 रुपये पर्यावरणीय जुर्माना वसूला जाए। इसके अलावा जुर्माने की राशि संबंधित प्राधिकरण या पुलिस चेक पोस्ट या ट्रांसपोर्ट विभाग द्वारा निर्धारित प्राधिकरण के जरिये वसूला जाए। जुर्माने की राशि का संग्रहण ट्रांसपोर्ट सचिव के अधीन एक अलग अकाउंट बनाकर किया जाए। जुर्माने से जो पैसा इकट्ठा हो, उसका इस्तेमाल वायु-ध्वनि प्रदूषण की रोकथाम के लिए किया जाना चाहिए।