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रोहतांग दर्रे में प्रतिबंध से ठंडे हो गए कई घरों के चूल्हे

Mon, 09 Nov 2015 01:02 PM IST
Updated Mon, 09 Nov 2015 01:02 PM IST
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NGT ban on commercial activities in rohtang creats problem for locals.

हिमाचल प्रदेश के मशहूर पर्यटक स्थल वशिष्ठ से रोहतांग दर्रा तक सभी तरह की व्यावसायिक और अन्य गतिविधियों पर अंकुश लगाए जाने से हजारों घरों के चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं। खासतौर से पर्यटकों को पारंपरिक ड्रेस व अन्य पर्यटन के सामान मुहैया कराने वाली स्थानीय महिलाओं को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

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दर्रा के आस-पास इलाकों में दशकों से अपने परिवार की आजीविका चलाने वाली इन महिलाओं ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) से गुहार लगाई है कि उन्हें इस रोजगार को दोबारा शुरू करने की अनुमति दी जाए क्योंकि उनके काम से किसी तरह का पर्यावरण प्रदूषण नहीं हो रहा है।
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जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। पंचांग, कोठी, सोलांग, कुलांग, रूअर गांव में रहने वाली इन महिलाओं की ओर से प्रसार महिला मंडल ने याचिका दाखिल की है। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट भक्ति परसीजा सेठी ने ग्रीन ट्रिब्युनल में इस मामले को उठाया है।
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एडवोकेट सेठी का कहना है कि ये महिलाएं पीढ़ियों से आने वाले पर्यटकों को किराये पर सामान मुहैया कराकर अपनी आजीविका चलाती हैं। इससे किसी तरह का पर्यावरण प्रदूषण नहीं होता है। मसलन, इन महिलाओं के पास आय का अन्य कोई स्रोत नहीं है। ऐसे में सभी तरह की गतिविधि पर प्रतिबंध से इनकी आजीविका को खतरा पैदा हो गया है।

स्नो ड्रेस मुहैया कराती हैं महिलाएं

NGT ban on commercial activities in rohtang creats problem for locals.

वशिष्ठ से लेकर रोहतांग दर्रा तक की दूरी 51 किमी है। इस दूरी में ये महिलाएं आने वाले पर्यटकों को पर्यटन संबंधी सामान मुहैया कराकर अपनी आजीविका चलाती थीं। पर्यटकों को पारंपरिक ड्रेस, स्नो ड्रेस, घूमने के लिये छड़ी किराये पर मुहैया कराई जाती थी। पर्यटकों को चाय पिलाना, घोड़े पर पर्यटक को बिठा कर घुमाना जैसी गतिविधियां भी शामिल हैं।

अटका है अभी तक पुनर्वास- वहीं अभी तक इन महिलाओं को न तो पुनर्वास योजना का लाभ मिला है न ही सरकार की ओर से कोई मदद की गई है। जबकि 16 जुलाई को एनजीटी ने अपने आदेश में कहा था कि वशिष्ठ से लेकर रोहतांग दर्रा के बीच प्रतिबंध आदेश से प्रभावित हुए सभी स्थानीय लोगों के लिये सरकार राहत और पुनर्वास कार्यक्रम की योजना तैयार कर पेश करे।

इस संबंध में कुल्लू डिप्टी कमिश्नर ने 6 अगस्त को एक पत्र भी जारी किया था। इसके बाद भी अभी तक इसपर कोई काम नहीं हो सका है।

मनाली, सोलांग में भी पर्यटन रोजगार पर प्रतिकूल असर

NGT ban on commercial activities in rohtang creats problem for locals.

याचिका के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में मनाली और सोलांग क्षेत्र भी प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है। सालाना यहां करीब 30 लाख पर्यटक आते हैं। साथ ही आने वाले अधिकांश पर्यटक रोहतांग दर्रा जाने की इच्छा रखते हैं। ऐसे में ज्यादातर स्थानीय आबादी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष पर्यटन से जुड़ी हुई है। यहां कई होटल, रेस्तरां और ट्रेवल एजेंसी मौजूद हैं। प्रतिबंध के फैसले से इन पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

एनजीटी ने 6 जुलाई 2015 को वशिष्ठ से लेकर रोहतांग दर्रा तक पर्यावरण प्रदूषण की रोकथाम के लिये सभी तरह की व्यावसायिक गतिविधियों और अन्य गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद से स्थानीय पर्यटन उद्यम से जुड़े लोगों की आजीविका ठप है।

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