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देश भर के अस्पतालों में अब नई दवाओं से होगा इलाज

Sun, 27 Dec 2015 09:47 AM IST
Updated Sun, 27 Dec 2015 09:47 AM IST
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new medicine will be used in all govt hospitals in india.

देश भर के सरकारी अस्पतालों में अब पुरानी दवाओं को हटाकर नई दवाओं से मरीजों का इलाज किया जाएगा। सरकारी अस्पतालों में बुखार में इस्तेमाल होने वाली, विटामिन सहित कई अन्य दवाओं को बदल दिया गया है। भारत सरकार ने 70 पुरानी दवाओं को राष्ट्रीय आवश्यक दवा सूची से हटाकर 106 नई दवाओं को शामिल किया है। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है।

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पुरानी दवाओं को उनकी गुणवत्ता, लागत आदि तमाम बातों को ध्यान में रखकर हटाने की बात की गई है। मंत्रालय के संयुक्त सचिव केएल शर्मा की ओर से जारी की गई इस अधिसूचना के मुताबिक भारत सरकार के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव डॉ. वीएम कटोच की अध्यक्षता में बनाई गई कमेटी ने राष्ट्रीय आवश्यक दवा सूची 2011 को संशोधित करने की सिफारिश की।
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इस कमेटी की रिपोर्ट 9 दिसंबर 2015 को मंत्रालय को मिली है। इस कमेटी की सिफारिश को भारत सरकार ने अपना लिया है। इसी के साथ नई राष्ट्रीय आवश्यक दवा सूची 2015 अधिसूचित की गई है। 23 दिसंबर 2015 को जारी की गई इस अधिसूचना को तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया है।
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सूची से हटाई गई कई दवाएं

new medicine will be used in all govt hospitals in india.

सूची से हटाई ओफ्लेक्सेसिन
टायफायड बुखार सहित कई अन्य रोगों में इस्तेमाल होने वाली चर्चित ओफ्लेक्सेसिन को सूची से हटा दिया गया है। इसी तरह विटामिन डी (अर्गोकैल्सिफेरोल), जिंक ऑक्साइड, आयरन डेक्टरोन जैसी दवाओं को भी हटाया गया है।

अस्पतालों में रखी जाती हैं ये दवाएं
राष्ट्रीय आवश्यक दवा सूची में शामिल की गई दवाओं को अस्पतालों में अनिवार्य रूप से रखा जाता है। अस्पताल के भीतर चिकित्सकों को भी इन्हीं दवाओं से मरीजों का इलाज करना होता है। आवश्यक दवाओं में लगभग तमाम तरह के रोगों की दवाएं शामिल होती हैं।

‘आवश्यक दवाओं की सूची को रिवाइज किया गया है तो भविष्य में ऐसी ही दवाओं को अस्पतालों में रखना होगा। राज्य की अपनी सूची भी राष्ट्रीय सूची को देखकर तैयार की जाती है।’- कपिल धीमान, सहायक दवा नियंत्रक, हिमाचल प्रदेश सरकार

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