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पति का साथ छूटा पर हौसला नहीं टूटा: हाथों में थामा ट्रक का स्टेयरिंग; हिमाचल की बेटी नीलकमल ठाकुर की कहानी

Sun, 08 Nov 2026 12:29 PM IST
Ankesh Dogra न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Ankesh Dogra Updated Sun, 08 Nov 2026 12:29 PM IST
सार

पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी ने हिमाचल प्रदेश की नीलकमल ठाकुर को ऐसा कदम उठाने के लिए प्रेरित किया, जिसने उन्हें अलग पहचान दिलाई। अर्की की 42 वर्षीय नीलकमल पिछले 10 वर्षों से ट्रक चला रही हैं। उन्होंने साबित किया है कि हौसला बुलंद हो तो महिलाएं किसी भी चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में अपनी जगह बना सकती हैं।

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अर्की की नीलकमल ठाकुर की संघर्ष भरी कहानी - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

कुछ कहानियां सिर्फ पढ़ी नहीं जातीं, महसूस की जाती हैं। कुछ संघर्ष ऐसे होते हैं, जिनमें इंसान की मजबूरी धीरे-धीरे उसकी ताकत बन जाती है। हिमाचल प्रदेश के अर्की की 42 वर्षीय नीलकमल ठाकुर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। पति का साथ छूटने के बाद जिंदगी ने उनके सामने मुश्किलों का पहाड़ खड़ा कर दिया, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे घुटने टेकने के बजाय खुद अपनी जिंदगी की कमान संभालने का फैसला किया। आज वही नीलकमल ट्रक का स्टेयरिंग थामकर हिमाचल की सड़कों पर दौड़ रही हैं।

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जब हालात ने बदला जिंदगी का रास्ता
पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी नीलकमल के कंधों पर आ गई। ऐसे समय में जब किसी भी इंसान के लिए खुद को संभालना मुश्किल हो जाता है, उन्होंने हिम्मत जुटाई और एक ऐसा रास्ता चुना, जिस पर चलने की कल्पना भी बहुत कम महिलाएं करती हैं।

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उन्होंने ट्रक चलाना शुरू किया। यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन परिवार की जिम्मेदारी निभाने के लिए उन्होंने अपने भीतर के डर और चुनौतियों से लड़ने का हौसला दिखाया।



 
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10 साल से पहाड़ों की सड़कों पर दौड़ा रही हैं ट्रक
आज नीलकमल को भारी वाहन चलाते हुए करीब 10 साल हो चुके हैं। हिमाचल जैसे पहाड़ी प्रदेश में ट्रक चलाना अपने आप में बड़ी चुनौती है। यहां के घुमावदार रास्ते, तीखे मोड़ और कठिन पहाड़ी मार्ग चालक से धैर्य, अनुभव और आत्मविश्वास की मांग करते हैं।


लेकिन नीलकमल ने इस चुनौती को अपनी पहचान बना लिया। जिस स्टेयरिंग को कभी महिलाओं के लिए असामान्य पेशा माना जाता था, उसी स्टेयरिंग को थामकर उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है।



उन्हें हिमाचल प्रदेश की पहली प्रोफेशनल महिला ट्रक ड्राइवर के रूप में भी बताया जा रहा है। उनका सफर उन तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो परिस्थितियों के कारण अपने सपनों और संभावनाओं को सीमित मान लेती हैं।

मजबूरी से शुरू हुआ सफर, अब बनी पहचान
नीलकमल की कहानी सिर्फ एक महिला के ट्रक चलाने की कहानी नहीं है। यह उस आत्मविश्वास की कहानी है, जो कठिन परिस्थितियों में जन्म लेता है। यह उस हिम्मत की कहानी है, जो जिम्मेदारियों के सामने टूटने के बजाय और मजबूत होती है। उन्होंने साबित किया है कि किसी काम की पहचान महिला या पुरुष से नहीं, बल्कि उसे करने वाले के हुनर, मेहनत और हौसले से होती है।
 

पहाड़ की इस बेटी का संदेश बहुत बड़ा है
समाज में आज भी कई बार महिलाओं के लिए पेशे और काम की सीमाएं तय कर दी जाती हैं। लेकिन नीलकमल जैसी महिलाएं इन धारणाओं को चुनौती देती हैं। उनका जीवन बताता है कि पति का साथ छूट जाने या जिंदगी में मुश्किल दौर आने का मतलब यह नहीं कि सफर खत्म हो गया। इंसान चाहे तो टूटे हुए हालात से भी नई शुरुआत कर सकता है।
 

नीलकमल ठाकुर आज सिर्फ ट्रक नहीं चला रहीं, बल्कि अपनी मेहनत से महिला आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान की एक मिसाल पेश कर रही हैं। उनकी कहानी का सबसे बड़ा संदेश यही है रास्ते कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर हौसला मजबूत हो तो मंजिल तक पहुंचने का रास्ता जरूर निकलता है।
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