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शिमला में अब नहीं बिक सकेंगे इतने डिग्री से ज्यादा ढलान वाले प्लॉट

Tue, 21 Nov 2017 09:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Tue, 21 Nov 2017 09:20 AM IST
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National green tribunal standards for sale of plots in shimla

राजधानी शिमला के प्लानिंग एरिया में अब 35 डिग्री से अधिक ढलान वाले प्लॉट नहीं बिकेंगे। बिकेगी। इससे कम ढलान वाले प्लॉट की रजिस्ट्री के लिए भी लोगों को टीसीपी का एनओसी लेना अनिवार्य होगा। इसके आधार पर ही राजस्व विभाग के अधिकारी प्लॉट की रजिस्ट्री कर सकेंगे।

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पर्यावरण को बचाने और पहाड़ को सुरक्षित रखने के लिए एनजीटी ने हिमाचल सरकार को यह निर्देश दिए हैं।एनजीटी के फैसले से जनता और टीसीपी के अधिकारियों का काम और बढ़ गया है।
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प्लॉट खरीदने और बेचने वाले को टीसीपी कार्यालय के चक्कर काटने पड़ेंगे। टीसीपी का इंजीनियर प्लॉट का निरीक्षण करेगा। उसके बाद लोगों को प्लॉट खरीदने के लिए एनओसी जारी होगा। यह एनओसी प्लॉट के ततीमा और जमाबंदी के साथ अटैच करना होगा। इसके आधार पर ही तहसीलदार प्लॉट की रजिस्ट्री करेगा। 

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अब शिमला के लिए नया डेवलपमेंट प्लान

National green tribunal standards for sale of plots in shimla

एनजीटी के आदेशों की कॉपी प्रदेश सरकार को मिल गई है। बताया जा रहा है कि 160 पेज की कापी को ध्यान में रखते हुए शिमला शहर के लिए नया डेवलपमेंट प्लान बनेगा। शहर में किस तरह से भवन बनेंगे, कहां-कहां सड़कें बनेंगी। सीवरेज सिस्टम और पानी के स्टोरेज टैंक आदि सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए यह प्लान तैयार होगा।

पहाड़ों में अब आसान नहीं भवन बनाना
शिमला के प्लानिंग एरिया में मकान बनाना खासा मुश्किल हो गया है। प्लानिंग एरिया के अधिकांश क्षेत्रों में 35 डिग्री स्लोप वाली जमीन नहीं है। वर्तमान टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के नियमों में 45 डिग्री जमीन के स्लोप में भवन बनाने की अनुमति दी जाती है। अब एनजीटी के आदेशों से विभाग के अधिकारी और जनता पसोपेश में हैं। 

9 फुट डंगा लगाने की है अनुमति
टीसीपी से मिली जानकारी के मुताबिक प्लाट के फ्रंट में 9 फुट तक डंगा लगाने की अनुमति दी जाती है। इससे ज्यादा डंगा लगाए जाने से एक तो पहाड़ी का व्यू खत्म होता है, दूसरे मकान खिसकने की भी संभावना रहती है।

बदलना पड़ेगा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट

National green tribunal standards for sale of plots in shimla

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के फैसले का असर शिमला के ड्रीम स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर भी पड़ने वाला है। 2905 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट के तहत लोअर बाजार से लेकर कृष्णानगर वार्ड तक कई नए आवासीय भवन, कामर्शियल कांपलेक्स, होटल, सर्विस अपार्टमेंट जैसी इमारतों का निर्माण होना है।

इन पर कुल बजट से करीब एक हजार करोड़ रुपये खर्च होने हैं। लेकिन, एनजीटी के फैसले के बाद अब इन भवनों के निर्माण के प्लान में बदलाव करना पड़ सकता है। पिछले तीन माह में अब तक जो प्रस्ताव तैयार हुआ है, उसके अनुसार इस एरिया में करीब चार मंजिल मकान बनाए जाने थे।

लेकिन अब एनजीटी के फैसले के बाद दोबारा तय करना होगा कि कृष्णानगर जैसे ढलानदार क्षेत्र में कितने मंजिला भवन बनाए जा सकते हैं। साथ ही सब्जी मंडी एरिया के लेबर हॉस्टल समेत रामबाजार और लोअर बाजार जैसे कोर एरिया में भी जो नए भवन बनने हैं, वे अब बनाए जाएंगे या नहीं। अगर बनने हैं तो कितनी मंजिल के होंगे।

निगम प्रशासन एनजीटी के आदेशों का अध्ययन कर जरूरी बदलाव करने की तैयारी में जुट गया है। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि अभी इसका प्लान फाइनल नहीं हुआ था लेकिन अब तक जो प्लान बना था, उसमें अब नियमों के तहत जरूरी बदलाव किए जाएंगे।

हजारों लोगों के लिए बनने हैं आवासीय भवन

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स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत कृष्णानगर वार्ड में हजारों लोगों को बसाने के लिए नए आवासीय भवन बनने हैं। पीएम आवास योजना और राजीव आवास योजना के बजट को भी इन पर खर्च किया जाएगा।

इसके लिए अर्बन रिनुअल पॉलिसी लाकर ज्यादातर ढारों को तोड़कर उनकी जगह नए आवासीय भवन बनाए जाने हैं। इसके अलावा 161 करोड़ से होटल डेवलपमेंट, 351 करोड़ से कामर्शियल कांपलेक्स और 170 करोड़ से सर्विस अपार्टमेंट के प्लान पर भी दोबारा होमवर्क करना होगा।

नहीं किए बदलाव तो लेनी पड़ेगी विशेष अनुमति
हालांकि, नगर निगम एनजीटी के फैसले के तहत ही अब इस प्रोजेक्ट की रूपरेखा तैयार करने का दावा कर रहा है। लेकिन यदि प्लान बदलता है तो इससे प्रोजेक्ट का बजट भी गड़बड़ा सकता है।

ऐसे में निगम यह भी देख रहा है कि यदि बजट बिगड़ता है तो फिर कोर्ट से विशेष अनुमति लेकर इसे लागू किया जाएगा। अध्ययन किया जा रहा है कि किन-किन प्रोजेक्टों को एनजीटी के आदेश प्रभावित कर रहे हैं।

क्या कहते हैं नोडल ऑफिसर
शिमला में प्रोजेक्ट के तहत जो भी नए निर्माण होने हैं, उनके प्रस्ताव को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है। अभी यह कहना मुश्किल है कि इन आदेशों का किस प्रोजेक्ट पर क्या असर होगा।

प्रयास यही है कि एनजीटी के आदेशों के तहत नियमों में रहकर ही प्रोजेक्ट का काम शुरू किया जाए। लेकिन आर्थिक तौर पर यदि यह संभव नहीं होता है तो कोर्ट से विशेष अनुमति लेने पर भी विचार किया जा सकता है। -प्रशांत सरकैक, नोडल ऑफिसर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट

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