पहले मंदिर में माथा टेका फिर मुस्लिम समुदाय ने निकाला ताजिया
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देवभूमि हिमाचल के नाहन शहर में मुस्लिम समुदाय ने सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश की है। शुक्रवार को उन्होंने पहले भगवान जगन्नाथ के मंदिर जाकर वामन द्वादशी का पर्व मनाया और उसके बाद मुहर्रम में शामिल होकर ताजिया निकाला।
35 साल बाद मुहर्रम और वामन द्वादशी का पर्व एक ही दिन होने के चलते मुस्लिम समुदाय ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और मस्जिद में नमाज अता की। मुस्लिम समुदाय हर साल भगवान जगन्नाथ की पालकी का स्वागत करता है।
शुक्रवार सुबह भारी संख्या में मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी के प्रदेश अध्यक्ष नसीम मोहम्मद दीदान समेत समुदाय के कई लोग बड़ा चौक स्थित भगवान जगन्नाथ के मंदिर पहुंचे।
जहां समुदाय विशेष के लोगों ने विश्व की खुशहाली और शहर की तरक्की के लिए भगवान से आशीर्वाद मांगा। जगन्नाथ मंदिर कमेटी के सदस्यों ने उनका स्वागत कर सम्मानित किया।
भगवान जगन्नाथ नाम के पटके भी पहनाए
उन्हें भगवान जगन्नाथ नाम के पटके भी पहनाए। पूजा अर्चना के बाद समुदाय के लोग मस्जिदों में जुमे की नमाज अता करने रवाना हुए। नसीम मोहम्मद दीदान ने बताया कि ऐतिहासिक शहर नाहन में हिंदू-मुस्लिम एकता और सांप्रदायिक सद्भावना की मिसाल पेश करते आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मुहर्रम मुस्लिम कैलेंडर की 10 तारीख हजरत हुसैन की याद को ताजा करती है। जो अत्याचारी शासक के खिलाफ नैतिकता व इंसाफ की लड़ाई लड़ते हुए अपने परिवार के 72 सदस्यों के साथ शहीद हो गए थे।
वहीं भगवान विष्णु मानव पर परोपकार का उपदेश देते हैं। मुस्लिम समुदाय के लोग भी हर साल भगवान वामन की पालकी का गर्मजोशी से स्वागत करते आ रहे हैं।